SMS Hospital: SMS Hospital की अन्नपूर्णा रसोई की दाल में चूहा मिलना कोई “हादसा” नहीं, बल्कि पूरे सरकारी सिस्टम के सड़ने का सबूत बनकर सामने आया है। यह वही रसोई है, जहां रोज सैकड़ों गरीब मरीज और उनके परिजन भरोसे के साथ भोजन करते हैं। अब सवाल यह नहीं है कि दाल में चूहा कैसे गिरा (SMS Hospital) असल सवाल यह है कि सिस्टम इतना गंदा कैसे हो गया?
हादसा नहीं, रोज़ की सच्चाई?
स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि रसोई की सफाई, स्टोरेज और निगरानी व्यवस्था पहले से ही सवालों के घेरे में थी। कीड़े, चूहे और बदबू की शिकायतें पहले भी हो चुकी थीं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया। यानी जो सामने आया, वह सिर्फ एक दिन की गलती नहीं—यह लंबे समय से चल रही लापरवाही का नतीजा है।
ठेकेदार, अफसर और चुप्पी की साझेदारी?
खास बात यह है कि घटना सामने आने के बाद भी
ठेकेदार पर FIR नहीं,
किसी अधिकारी का निलंबन नहीं,
और न ही रसोई का संचालन तत्काल बंद किया गया।
सवाल सीधा है—क्या ठेकेदार और अफसरों के बीच कोई अदृश्य सुरक्षा कवच है?
भजनलाल सरकार के “सुशासन” की परख
भजनलाल सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन गरीब की थाली में चूहा मिलना उन दावों पर करारा तमाचा है। अगर यही खाना किसी मंत्री, विधायक या बड़े अफसर के सामने परोसा जाता, तो क्या प्रशासन इतनी शांति बनाए रखता?
अब यह सिर्फ गंदे खाने का मामला नहीं रहा—यह जनता के भरोसे के ज़हर में बदलने का मामला बन चुका है। लोग दहशत में हैं कि न जाने कितने लोग वह दाल खा चुके होंगे और आने वाले दिनों में कौन बीमार पड़ेगा।


















































