जेसीबी चली, पुलिस खड़ी रही, होटल गिरता रहा, मालिक रोता रहा, आखिर यह कार्रवाई किसके इशारे पर

Jaipur Hotel Demolition: मालवीय नगर सेक्टर-9 में लगभग पूरा हुआ पाँच-मंजिला (G+4) होटल अचानक धराशायी हो गया। प्राधिकरण का कहना है कि इस पर अनुमति नहीं थी, जबकि मालिकों ने नगर निगम में जमा की गई फीस और अनुमति होने का दावा किया — मामला अब सुरक्षा, जवाबदेही और राजनीतिक दखल के एंगल पर गरम हो गया है।
यह वाकया सिर्फ एक इमारत के गिरने से अधिक है: तेजी से बनते परिष्कृत निर्माण, बेसमेंट खोदने के दौरान हुई दरारें और तत्काल जेसीबी से संरचना कमजोर करने की कार्रवाई मिलकर यह सवाल उठाती हैं (Jaipur Hotel Demolition)कि क्या शहरी नियमन पर्याप्त रूप से लागू हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों और मालिकों के आरोपों ने इस घटना को ‘सुरक्षा विफलता’ से जोड़ दिया है, जबकि प्राधिकरण ‘अनुमति नहीं’ का पक्ष रखता है।

घटना का पूरा घटनाक्रम

मालवीय नगर के सेक्टर-9 (अमित भारद्वाज पेट्रोल पंप के सामने) स्थित 90 गज में बने होटल का बाह्य भाग लगभग पूरा था और इंटीरियर का काम चल रहा था। शनिवार को बेसमेंट के पास खुदाई के दौरान इमारत में दरारें पड़ गईं और एक तरफ झुकन दिखाई देने लगी — जिसे दो क्रेन से अस्थायी सहारा दिया गया। इसके बाद जेसीबी मशीनों से ड्रिलिंग कर इमारत की संरचना कमजोर कर दी गई और अंततः होटल धराशायी कर दिया गया।

अनुमति जमा और ‘राजनीतिक पावर’ का आरोप

होटल के मालिकों का कहना है कि उन्होंने नगर निगम से अनुमति ली थी और इसके लिए 1,25,000 रुपए जमा किए थे। वे आरोप लगाते हैं कि जेडीए (JDA) की कार्रवाई में राजनीतिक प्रभाव दिखा और किसी भी कानूनी टीम या उनके आर्किटेक्ट से बातचीत नहीं की गई। मालिकों ने कहा: “हमारे आर्किटेक्ट से बात नहीं की गई — एक भी लीगल टीम मौजूद नहीं थी।”

जोनिंग नियम का उल्लंघन और बिना अनुमति निर्माण

जेडीए के तहसीलदार शिवांग शर्मा ने बताया कि यह भवन रेजिडेंशियल क्षेत्र में बना हुआ था और वहाँ कॉमर्शियल गतिविधि की अनुमति नहीं है। डिप्टी इन्फोर्समेंट ऑफिसर इस्माइल खान ने साफ़ कहा कि प्राधिकरण से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई। जेडीए का कहना है कि बेसमेंट और व्यावसायिक उपयोग जैसे कारक नियमों के खिलाफ थे, इसलिए कार्रवाई आवश्यक थी।

स्थानीयों की चिंता: पड़ोसी सुरक्षा और अप्रत्याशित खतरा

पास में रहने वाले महेंद्र हल्दिया ने बताया कि खुदाई के समय ही दरारें पड़ना शुरू हो गई थीं और इससे स्थानीय निवासियों में भय फैल गया। इस घटना ने यह चिंता पैदा कर दी है कि क्या शहर के अन्य निर्माण भी समान जोखिम के अधीन हैं और क्या पड़ोसियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

क्या होना चाहिए

इस मामले में आवश्यक है कि स्थानीय प्रशासन (नगर निगम, JDA) और पुलिस पारदर्शी जांच कराएँ, मालिकों के जमा शुल्क और अनुमति के दस्तावेज़ों की तत्काल सत्यापन हो, और यदि प्रशासनिक त्रुटि हुई हो तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसे निर्माणों की प्री-इंस्टॉलेशन जांच और पड़ोसियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम लागू करने की आवश्यकता है।

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Bodh Saurabh Web Team

Bodh Saurabh is an experienced Indian journalist and digital media professional, with over 14 years in the news industry. He currently works as the Assistant News Editor at Bodh Saurabh Digital, a platform known for providing breaking news and videos across a range of topics, including national, regional, and sports coverage.

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