Jeffrey Epstein Network: पश्चिमी एशिया में बारूद की गंध और अमेरिका-ईरान के बीच छिड़ी सीधी जंग ने पूरी दुनिया को दहला दिया है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और शेयर बाजारों में मचे कोहराम के बीच निवेशकों को उम्मीद थी कि ‘सेफ हेवन’ माना जाने वाला सोना-चांदी आसमान छुएगा। लेकिन, हकीकत इसके उलट निकली। (Jeffrey Epstein Network) युद्ध की शुरुआत के बाद से कीमती धातुओं की कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई है, जिसने बाजार विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है।
महायुद्ध के बीच चांदी की चमक हुई फीकी
आमतौर पर आपदा या युद्ध के समय चांदी की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई है। बीती 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की, उससे ठीक एक दिन पहले मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का भाव ₹2,82,644 प्रति किलोग्राम था। युद्ध के 16 दिनों के भीतर (महज 10 कारोबारी सत्रों में) चांदी लुढ़ककर ₹2,59,279 प्रति किलो पर आ गई। इस छोटी सी अवधि में चांदी के दाम में 23,365 की बड़ी गिरावट आई है।
अगर इसके ऐतिहासिक उच्च स्तर से तुलना करें, तो गिरावट और भी चौंकाने वाली है। 29 जनवरी को चांदी ₹4,20,048 के लाइफटाइम हाई पर थी। उस शिखर से अब तक चांदी करीब ₹1,60,769 सस्ती हो चुकी है।
सोने के दाम में भी भारी सेंध
चांदी की तरह सोने (24 कैरेट) ने भी निवेशकों को चौंकाया है। 27 फरवरी को एमसीएक्स पर सोना ₹1,62,104 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो शुक्रवार तक गिरकर 1,58,400 पर सिमट गया। यानी युद्ध के तनाव के बीच सोने की कीमत में 3,704 की कमी आई है। अपने रिकॉर्ड हाई 1,93,096 के मुकाबले अब सोना ₹34,696 कम कीमत पर उपलब्ध है।
तनाव के बावजूद क्यों टूट रही हैं कीमतें?
युद्ध जैसी स्थिति में अक्सर सोना-चांदी महंगे होते हैं, लेकिन इस गिरावट के पीछे दो मुख्य ‘खलनायक’ काम कर रहे हैं: मजबूत डॉलर और कच्चा तेल।
- कच्चे तेल का उबाल: युद्ध के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
- डॉलर की मजबूती: वैश्विक अनिश्चितता के दौर में अमेरिकी डॉलर बेहद मजबूत स्थिति में पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर का मजबूत होना और उच्च ब्याज दरें हमेशा कीमती धातुओं पर दबाव बनाती हैं। जब डॉलर ज्यादा रिटर्न देने लगता है, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर करेंसी मार्केट में लगाने लगते हैं।
क्या फिर आएगी तेजी?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान गिरावट एक अस्थाई ‘करेक्शन’ हो सकती है। डॉलर की मजबूती ने भले ही अभी कीमतों पर ब्रेक लगा दिया हो, लेकिन अगर युद्ध लंबा खिंचता है और सप्लाई चेन बाधित होती है, तो भविष्य में सोना और चांदी एक बार फिर जोरदार वापसी कर सकते हैं। फिलहाल, खरीदारी की योजना बना रहे लोगों के लिए यह गिरावट एक बड़े अवसर की तरह देखी जा रही है।

















































