Nandni Mata: बडोदिया (बांसवाड़ा)। जब भक्ति संगठित होती है, तो पहाड़ भी साक्षी बनते हैं। बांसवाड़ा–मुंबई हाईवे पर बडोदिया-चोखला के समीप 1500 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित वागड़ के पावागढ़ नंदनी माता शक्ति पीठ पर शनिवार को ऐसा ही ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। मंदिर शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत स्वर्ण शिखर, वैदिक अनुष्ठान और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने पूरे वागड़ को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
माघ–फाल्गुनी कृष्ण षष्ठी के पावन अवसर पर आयोजित 51 कुंडीय शतचंडी, गणेश याग एवं रुद्र भैरव याग महायज्ञ में पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। ( Nandni Mata) दिनभर मां नंदनी के जयकारों से पूरा धाम गूंजता रहा।
यज्ञ वेदी से शिखर तक….
प्रातःकाल प्रधान आचार्य किशोर शुक्ला एवं सह आचार्य कपिल शास्त्री के निर्देशन में शिखर प्रतिष्ठा कर्म संपन्न हुआ। कुल 65 ब्राह्मणों द्वारा देवता पूजन, शिखर मूर्ति प्रतिष्ठा, कीर्ति स्तंभ स्थापना, 81 कलशात्मक स्नपन, व्याप्ति होम एवं पूर्णाहुति विधिवत कराई गई। यज्ञाग्नि से उठती आहुतियों में वागड़ सहित विश्व मंगल की कामना की गई।
जब भक्ति खुद चल पड़ी…
नंदनी माता विकास समिति के अनुसार, दो वर्षों की मेहनत से बने श्वेत पाषाण मंदिर के शिखर को सिर पर धारण कर यजमान परिवारों ने डमरू-नगाड़ों की गूंज के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली। समिति अध्यक्ष जितेंद्र पाटीदार के सानिध्य में सभी 51 कुंडीय यजमानों ने पूर्णाहुति देकर विश्व कल्याण की प्रार्थना की।
जैसे ही मंत्रोच्चारण के साथ मुख्य मंदिर पर स्वर्ण शिखर स्थापित किया गया, पूरा क्षेत्र जयकारों से गूंज उठा। ढोल-नगाड़ों और शहनाइयों के बीच शिखर से फैलती स्वर्णिम आभा श्रद्धालुओं को भावविभोर करती रही। वहीं, वागड़ की सबसे ऊंची पहाड़ी पर लहराती ध्वजा ने पूरे क्षेत्र में शुभ संकेतों का संदेश दिया।
मां के आंगन में गणेश, सिंह वाहन और श्री यंत्र की प्रतिष्ठा
इस अवसर पर गणेश मूर्ति, सिंह वाहन, श्री यंत्र सहित विभिन्न धार्मिक प्रतीकों की वैदिक विधि से स्थापना की गई। मां नंदनी का दिव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
महिला मंडलों द्वारा गाए गए फाल्गुनी गीतों ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया। गुलाबी पुष्पों से सुसज्जित मां की प्रतिमा और सुवासित यज्ञ मंडप में श्रद्धालुओं को ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं मां भक्तों संग होली खेल रही हों।
हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई, जिसमें विभिन्न गांवों के समाजजनों, जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल सहित कई गणमान्य लोग आयोजन में शामिल हुए।
उम्र की सीमाएं टूटीं, आस्था बनी शक्ति
महोत्सव के दौरान आस्था की कई मिसालें सामने आईं। 90 वर्षीय दली धर्मपत्नी प्रेमजी पाटीदार, 75 वर्षीय रशी देवी और 95 वर्षीय बबली रावत ने कठिन पहाड़ी चढ़ाई कर मां नंदनी के दर्शन किए। इन दृश्यों ने साबित कर दिया कि सच्ची भक्ति के आगे उम्र और शारीरिक सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं।
नंदनी माता शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वागड़ की सामूहिक आस्था, संगठन और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण बन गया है। वागड़ का पावागढ़ अब श्रद्धा और भविष्य की उम्मीदों का स्थायी शिखर बन चुका है।



















































