निशान-ए-पाकिस्तान की चर्चा क्यों? राहुल गांधी पर BJP के तीर, नया बवाल खड़ा!

Operation Sindoor : भारतीय सेना द्वारा हाल ही में अंजाम दिए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने देशवासियों को गर्व से भर दिया है। पाकिस्तान की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देकर भारत ने फिर से अपनी सैन्य दक्षता का लोहा मनवाया है। लेकिन इस जीत के बीच, राजनीतिक गलियारों में नया बवाल छिड़ गया है।(Operation Sindoor ) कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा सरकार पर उठाए गए सवालों ने एक नया सियासी मोर्चा खोल दिया है, जिस पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है।


राहुल गांधी का हमला: “यह सिर्फ चूक नहीं, बल्कि पाप है!”

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की चुप्पी पर सवाल उठाए और ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने लिखा…“अगर पाकिस्तान को पहले से जानकारी थी तो हमारे कितने विमान गिरे? क्या यह कोई चूक नहीं बल्कि अपराध नहीं है?” इसके साथ ही राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री से जवाब मांगते हुए इस चूक को “पाप” करार दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार ऑपरेशन सिंदूर को एक रणनीतिक विजय के रूप में प्रचारित कर रही है।


अमित मालवीय का पलटवार: “पाकिस्तान से निशान-ए-पाकिस्तान कब लोगे?”

राहुल गांधी के इस बयान ने भाजपा को भड़कने का मौका दे दिया। पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक मोंटाज फोटो साझा की जिसमें राहुल गांधी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की आधी-आधी तस्वीरें जोड़ी गई थीं।

उन्होंने तंज कसते हुए लिखा…“राहुल गांधी ने न तो ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर प्रधानमंत्री को बधाई दी, न ही पाकिस्तान पर भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई की प्रशंसा की। वह बार-बार यह पूछ रहे हैं कि हमारे कितने जेट गिरे, लेकिन उन्होंने यह नहीं पूछा कि पाकिस्तान के कितने एयरक्राफ्ट ध्वस्त किए गए।” सबसे तीखी टिप्पणी में मालवीय ने कहा…“क्या अगला कदम पाकिस्तान से ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ पुरस्कार लेना होगा?”


DGMO का समर्थन: “निर्णायक कार्रवाई की गई”

भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करने के लिए सेना के बयान का भी सहारा लिया। DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई के 11 मई के वीडियो बयान को साझा करते हुए मालवीय ने कहा कि सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पूरी तैयारी के साथ कार्यवाही की।

घई ने अपने बयान में कहा था…“भारत ने पाकिस्तान के अनुरोध को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया और जवाबी हमले के लिए पूरी तरह तैयार था। यह ऑपरेशन निर्णायक और रणनीतिक रूप से सफल रहा।”


 आलोचना बनाम देशभक्ति – सीमा कहां है?

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वही पुराना लेकिन महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है – क्या सरकार से सवाल करना राष्ट्रविरोध है?
राहुल गांधी का तर्क है कि वे जवाबदेही और पारदर्शिता चाहते हैं, जबकि भाजपा इसे ‘पाकिस्तान की भाषा बोलना’ मान रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस विवाद से दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थकों को साधने में लगे हैं। कांग्रेस जहां मोदी सरकार की विदेश नीति पर हमलावर है, वहीं भाजपा इस विवाद को राष्ट्रवाद बनाम आलोचना की बहस में बदलना चाहती है।

ऑपरेशन के बाद सियासी मोर्चा खुला

‘ऑपरेशन सिंदूर’ भले ही सैन्य स्तर पर एक सफलता रही हो, लेकिन राजनीतिक मोर्चे पर यह एक नई लड़ाई की शुरुआत बन गया है। सवाल अब सिर्फ कूटनीति या रक्षा रणनीति का नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श की गरिमा और देशभक्ति की परिभाषा का हो चला है।

क्या सेना के पराक्रम पर सवाल उठाना देशविरोध है? क्या सत्ता पक्ष हर सवाल को पाकिस्तान की भाषा मानकर खारिज करेगा? इन सवालों के जवाब भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

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Bodh Saurabh Web Team

Bodh Saurabh is an experienced Indian journalist and digital media professional, with over 14 years in the news industry. He currently works as the Assistant News Editor at Bodh Saurabh Digital, a platform known for providing breaking news and videos across a range of topics, including national, regional, and sports coverage.

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