Operation Sindoor: एक ओर पूरा देश भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर पर गर्व कर रहा था, वहीं संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ऐसा सवाल पूछ दिया, जिसने सियासी तूफान खड़ा कर दिया।
सवाल था…..क्या भारत ने पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी पहले से दे दी थी? (Operation Sindoor)इस एक सवाल ने न सिर्फ सैन्य रणनीति पर सवालिया निशान लगाने की कोशिश की, बल्कि विपक्ष की मंशा को लेकर भी कई शंकाएं पैदा कर दीं। और हैरानी की बात यह है कि इस सवाल का जवाब तो भारतीय सेना पहले ही दे चुकी थी!
DGMO ने पहले ही खोल दी थी सारी परतें!
11 मई, यानी राहुल गांधी के बयान से कई दिन पहले ही, भारतीय सेना के DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरी बात साफ कर दी थी। उन्होंने कहा…“ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद हमने पाकिस्तान के DGMO को जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने न सिर्फ इसे खारिज किया, बल्कि कहा कि जवाब तय है। हम इसके लिए पूरी तरह तैयार थे।” यानि सेना ने हमले के बाद राजनयिक परंपराओं का पालन करते हुए जानकारी साझा की थी, लेकिन पाकिस्तान ने इसे हल्के में लिया। तो फिर राहुल गांधी ने ऐसा सवाल क्यों उठाया? क्या उन्हें DGMO का बयान नहीं पता था, या जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
विदेश मंत्रालय ने भी दिया करारा जवाब
DGMO के बाद अब विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी राहुल गांधी के आरोपों की धज्जियां उड़ा दीं। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा…“विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के बाद चेतावनी दी गई थी, पहले नहीं।” MEA के मुताबिक राहुल गांधी द्वारा संसद में पेश किया गया सवाल गुमराह करने वाला, भ्रामक और तथ्यहीन था। इससे न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ हुआ, बल्कि दुश्मन को भी राजनीतिक भ्रम का मौका मिला।
दुश्मन को चीरता भारतीय पराक्रम
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 मासूम लोगों की जान चली गई थी। यह हमला देश के सीने पर एक और घाव था।
लेकिन भारत ने इस बार चुप नहीं बैठने का फैसला किया। 6-7 मई की रात, भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 बड़े आतंकी ठिकानों को तबाह कर डाला। इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए।
इस हमले से बौखलाया पाकिस्तान 7 से 10 मई के बीच भारत पर ड्रोन और मिसाइल हमले करने लगा, लेकिन भारतीय सेना ने भी जवाब देने में देर नहीं लगाई — पाकिस्तान के 11 एयरबेस तबाह कर दिए गए।
सियासत बनाम सुरक्षा: कब तक चलेगा यह खेल?
देश की सुरक्षा और सेनाओं की रणनीति पर इस तरह के सवाल उठाना क्या एक जिम्मेदार विपक्ष की पहचान है? जब सेना की तरफ से साफ-साफ बयान दिया जा चुका हो, तब ऐसे सवाल उठाना राजनीति के स्तर को गिराने जैसा है।
क्या विपक्ष को नहीं पता कि सेना की कार्रवाई पर संदेह जताकर वह किनका हौसला बढ़ा रहा है? क्या यह बयान पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को ताकत नहीं देता?
ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं था, यह भारत की संप्रभुता, साहस और जवाब देने की क्षमता का प्रतीक था। ऐसे वक्त में जब सेना दुश्मन के घर में घुसकर उसे सबक सिखा रही हो, तब संसद में बैठे नेता सवाल नहीं, बल्कि समर्थन दें – यही राष्ट्रहित में होगा।
क्या आपको लगता है राहुल गांधी का सवाल सही था या सिर्फ सियासी ड्रामा? कमेंट में अपनी राय जरूर दें!
यह भी पढ़ें:
2:30 बजे कांपी पाकिस्तान सरकार, ऑपरेशन सिंदूर से उजड़ गया आतंकी ठिकाना, शहबाज की जुबान खुली


















































