Mukhyamantri Nishulk Dava Yojana: राज्य की निशुल्क दवा योजना, जो गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित होनी थी, आज प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था का शिकार बन गई है। दवाओं के रेट कांट्रेक्ट नहीं होने की वजह से सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रहीं।(Mukhyamantri Nishulk Dava Yojana) हालात इतने बदतर हो गए हैं कि बीते 70 दिनों में प्रदेश के अस्पतालों को 67 लाख रुपये से ज्यादा की दवाएं लोकल परचेज के जरिए खरीदनी पड़ी हैं। यह न केवल योजना की विफलता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक महत्वाकांक्षी पहल आमजन के लिए संकट में बदल रही है। क्या यह मरीजों के साथ एक अनकही लापरवाही का दस्तावेज़ नहीं बनता?
राजस्थान में निशुल्क दवा योजना पर संकट
राजस्थान की निशुल्क दवा योजना, जो जरूरतमंदों को राहत देने के लिए बनाई गई थी, अब अपनी धीमी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक लापरवाहियों के कारण संकट में है। दवाओं की सप्लाई का जिम्मा संभालने वाले राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) द्वारा दवाओं के रेट कांट्रेक्ट नहीं किए जाने से पूरे राज्य में दवाओं की उपलब्धता बाधित हो गई है।
महंगी दवाओं की खरीद से बढ़ा वित्तीय बोझ
आरएमएससीएल की तुलना में लोकल परचेज के जरिए खरीदी जा रही दवाएं 30% महंगी साबित हो रही हैं। यदि आरएमएससीएल किसी दवा को 10 रुपए में खरीदता है, तो मेडिकल कॉलेजों के अस्पताल वही दवा 13-14 रुपए में खरीदने पर मजबूर हैं। इस कीमत वृद्धि के चलते राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ रहा है। बीते 70 दिनों में जयपुर के अस्पतालों में ही 20 लाख रुपए से अधिक की लोकल परचेज हो चुकी है।
अस्पतालों में दवाओं की भारी कमी
अक्टूबर 2024 से आरएमएससीएल की ओर से दवाओं की सप्लाई रुकी हुई है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। कई सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की भी कमी हो गई है। जयपुर के एसएमएस अस्पताल, जेके लोन, महिला अस्पताल, गणगौरी और कांवटिया अस्पताल जैसे प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में दवाओं की आपूर्ति बाधित है। वहीं, सीएचसी-पीएचसी और जिला अस्पतालों में लोकल परचेज भी नहीं हो रही है, जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मंत्री का दावा…दवाएं पर्याप्त उपलब्ध
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर का कहना है कि प्रदेश में निशुल्क दवा योजना के तहत अधिकांश दवाएं उपलब्ध हैं। जिन दवाओं की दर संविदा समाप्त हो रही है, उनकी प्रक्रिया जारी है और जल्द ही इसे पूर्ण कर लिया जाएगा। उनके अनुसार, पैरासिटामोल, कफ सिरप, एजीथ्रोमाइसिन जैसी महत्वपूर्ण दवाएं औषधि गृहों और चिकित्सा संस्थानों में पर्याप्त मात्रा में हैं।
भविष्य की चुनौतियां… जल्द खत्म होंगी 1082 दवाएं
यदि समय पर रेट कांट्रेक्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो जून 2024 तक 1082 दवाएं खत्म हो जाएंगी। इनमें सर्जिकल सूचर, एंटीकोल्ड ड्रॉप, फेस मास्क और कई महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं। आरएमएससीएल द्वारा जुलाई 2024 में टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन 120 दिनों के भीतर इन्हें फाइनल करने का नियम होते हुए भी अब तक यह प्रक्रिया अधूरी है।
राजस्थान की निशुल्क दवा योजना, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम मानी जाती थी, वर्तमान में अव्यवस्थाओं और देरी की शिकार है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह योजना आमजन के लिए राहत देने के बजाय संकट का कारण बन सकती है।
यह भी पढ़ें
150 विद्वानों की मौजूदगी में ज्योतिष महाकुंभ, निशुल्क परामर्श….भारत के भविष्य पर चर्चा


















































