Jaipur News: जयपुर। भारत विकास परिषद, महेश नगर शाखा ने मंगलवार को सेवा भारती स्कूल (बाल विद्यालय), शारदा कॉलोनी, महेश नगर में दो चरणों वाला सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किया—पहले चरण में गुरुवंदन–छात्र अभिनंदन और दूसरे चरण में एनीमिया जांच शिविर। उद्देश्य स्पष्ट था: शिक्षा में उत्कृष्टता के साथ बच्चियों के स्वास्थ्य पर ठोस ध्यान।
कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम के संग एवं भारत माता और स्वामी विवेकानंद के चित्र समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष रणवीर सिंह त्यागी ने भारत विकास परिषद की (Jaipur News)पांच सूत्रीय गतिविधियों और ‘गुरुवंदन–छात्र अभिनंदन’ की उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी दी।
गुरुओं का सम्मान, मेधावी छात्रों का अभिनंदन
- स्कूल संचालिका विमला बहन (दादी अम्मा), प्रधानाचार्य नीरज सहित 10 शिक्षकों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
- सत्र 2024–25 में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले 5 छात्र-छात्राओं को अंगवस्त्र व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
- संस्था प्रधान नीरज ने विद्यार्थियों को कठोर परिश्रम और उच्च लक्ष्य साधने का संदेश दिया।
स्वास्थ्य पर जोर: एनीमिया जांच शिविर
द्वितीय चरण में आयोजित एनीमिया जांच शिविर में 53 बालिकाओं एवं स्टाफ की जांच की गई। बालिकाओं के स्वास्थ्य-स्तर को नियमित रूप से ट्रैक करने और परामर्श प्रदान करने पर बल दिया गया, ताकि एनीमिया-मुक्त छात्राएं अभियान को गति मिले। “शिक्षा और स्वास्थ्य—दोनों को साथ लेकर चलना ही सशक्त समाज की आधारशिला है।”
संकल्प और सहभागिता
संरक्षक महेंद्र सिंघल ने विद्यार्थियों, विद्यालय स्टाफ व परिषद सदस्यों को शपथ दिलाई और सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। लगभग 200 छात्र-छात्राएं एवं 12 शिक्षण/गैर-शिक्षण कर्मियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ।
उपस्थितगण एवं परिषद के पदाधिकारी
प्रांतीय अध्यक्ष रणवीर सिंह त्यागी, संरक्षक महेंद्र सिंघल, अध्यक्ष सीताराम गुप्ता, सचिव लोकेंद्र कुमार गर्ग, गोपाल गुप्ता, सुदेश शर्मा, गिरधारी अग्रवाल, राजेंद्र आर्य, कमलेश रावत, महेश गुप्ता, सुरेश गर्ग, शिवचरण जिंदल, अर्चना जिंदल, संतोष सिंघल, बनवारी और प्रचार प्रभारी भवनेश गुप्ता सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
अगला कदम
परिषद ने संकेत दिया कि आगे भी स्वास्थ्य जागरूकता और शैक्षिक उत्कृष्टता पर केंद्रित संयुक्त कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी रहेगी, ताकि स्कूल-स्तर पर एनीमिया नियंत्रण और गुरु–शिष्य परंपरा दोनों को सुदृढ़ किया जा सके।
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