अब शादी में नहीं चलेगा दिखावा! ब्राह्मण महासभा ने लागू की दो-मिठाई नीति, दहेज पर सख्त रोक

Jaipur News: जयपुर। गायत्री परिवार के संस्थापक युग ऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने पांच दशक पूर्व दुष्ट दहेज खर्चीली शादी दोनों ही करती बर्बादी का नारा दिया था। गायत्री परिवार ने इस नारे को जन जन तक पहुंचाया। युग ऋषि के विचार क्रांति के बीज अब सामाजिक संस्थाओं के माध्यम वृक्ष बनने लगे है। सामाजिक संस्थाएं विवाह जैसे आयोजन को सादगी से करने के लिए सहमत हो रही है। इसी कड़ी में एमआई रोड के चैंबर भवन में आयोजित सर्व ब्राह्मण महासभा की प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक में समाज के वर्तमान सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

सर्व सम्मति से विवाह एवं सामाजिक आयोजनों से जुड़े अनेक ऐतिहासिक, सुधारात्मक एवं दूरगामी निर्णय  लिए गए। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा ने की। बैठक में एच.सी. गणेशिया, आचार्य राजेश्वर, गोविन्द पारीक, दिनेश शर्मा, श्योपत सिंह कायल, राधेश्याम मेहता, सविता शर्मा, बी.बी. शर्मा, बाबूलाल शर्मा, (Jaipur News) अनिल सारस्वत सहित महासभा के अनेक पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष, संगठन मंत्री एवं प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

बैठक में इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई कि वर्तमान समय में विवाह जैसे पवित्र संस्कार को दिखावे, प्रतिस्पर्धा और सुविधा-आधारित आयोजन बना दिया गया है। इससे समाज के मध्यम एवं सामान्य वर्ग पर अनावश्यक आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए समाज सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
प्रदेश कार्यकारिणी ने निर्णय लिया कि विवाह, सगाई, रिसेप्शन एवं अन्य मांगलिक आयोजनों में भोजन को सादा, सीमित एवं मर्यादित रखा जाएगा, ताकि फिजूलखर्ची पर नियंत्रण हो और सामाजिक समानता को बढ़ावा मिले।

निर्धारित भोजन व्यवस्था इस प्रकार होगी:

अधिकतम दो मिठाई, अधिकतम दो सब्जी, एक दाल या कड़ी, चपाती या पूड़ी, चावल,सलाद, रायता, छाछ, चाट, आइसक्रीम, फास्ट फूड अत्यंत सीमित। प्रदेश कार्यकारिणी ने दो-मिठाई नीति को सामाजिक परंपरा के रूप में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि भोजन अतिथि सम्मान का माध्यम हो, प्रदर्शन का नहीं। साथ ही विवाह-सामाजिक आयोजनों में उतना ही लो थाली व्यर्थ न जाए नाली में का प्रभावी संदेश भी दिया जाएगा।

विवाह में शुभ मुहूर्त की अनिवार्यता:

बैठक में स्पष्ट किया गया कि विवाह केवल सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सोलह संस्कारों में प्रमुख संस्कार है। इसलिए विवाह शुभ मुहूर्त एवं पंचांग के अनुसार ही संपन्न हो। मुहूर्त के अनुसार कार्यक्रम तय किए जाएं, न कि सुविधा के अनुसार।
गणेश पूजन, वर-वधू प्रवेश, पाणिग्रहण, सप्तपदी, फेरे सहित सभी विधियां शास्त्रसम्मत एवं पूर्ण विधि-विधान से संपन्न की जाएं। पंडित एवं आचार्य को विधि संपादन की पूर्ण स्वतंत्रता दी जाए। देर रात तक कार्यक्रम खींचकर मुहूर्त भंग करने एवं केवल हॉल, कैटरर या डीजे की सुविधा के अनुसार समय तय करने की प्रवृत्ति को संस्कारों के विरुद्ध बताया गया।

अन्य महत्वपूर्ण निर्णय:

-दहेज लेना-देना सामाजिक अपराध माना जाएगा
-दहेज-मुक्त विवाह को सामाजिक सम्मान प्रदान किया जाएगा
-दिखावे एवं फिजूलखर्ची पर नियंत्रण
-अत्यधिक सजावट, भव्य मंच एवं अनावश्यक लाइटिंग से परहेज
-सादगी को सामाजिक प्रतिष्ठा का मानदंड माना जाएगा
-विवाह समारोहों में अश्लील गीत, अमर्यादित नृत्य एवं अनुचित प्रस्तुतियों पर पूर्ण रोक
-सभी कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, मर्यादा एवं शालीनता के अनुरूप हों
-समाज क्या कहेगा की मानसिकता को हतोत्साहित किया जाएगा।
-किसी भी परिवार को कर्ज लेकर या सामथ्र्य से अधिक खर्च करने के लिए बाध्य न किया जाए।
-विवाह कार्यक्रम शांत, सुव्यवस्थित एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हों।
-आयोजनों में बुजुर्गों, मातृशक्ति एवं पंडित-आचार्यों के सम्मान को प्राथमिकता

Bodh Saurabh Web Team

Bodh Saurabh is an experienced Indian journalist and digital media professional, with over 14 years in the news industry. He currently works as the Assistant News Editor at Bodh Saurabh Digital, a platform known for providing breaking news and videos across a range of topics, including national, regional, and sports coverage.

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