Vice President Election 2025: नई दिल्ली। 9 सितंबर 2025 को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में अब सिर्फ प्रत्याशी चुनने का सिलसिला नहीं, बल्कि रणनीतिक बाज़ीगरी भी चल रही है। जहां NDA ने पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को उम्मीदवार तय करने की अधिकृतता दे दी है,(Vice President Election 2025) वहीं विपक्षी INDIA ब्लॉक एक संयुक्त नाम पर सहमति बनाकर राजनीतिक दबाव बनाना चाहता है — ताकि चुनाव की रूपरेखा NDA के लिए चुनौतीपूर्ण बनी रहे।
कहां है खेल? — विरोधी रणनीति का भाव
INDIA ब्लॉक के वरिष्ठ नेता फिलहाल खुले तौर पर प्रत्याशियों का ऐलान नहीं कर रहे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेता बैकचैनल कन्सल्टेशन में हैं। विपक्षी रणनीति का लक्ष्य है — पहले भाजपा को अपना नाम घोषित करने के लिए मजबूर करना, फिर संयुक्त विरोधी उम्मीदवार पेश कर सत्तापक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाना। इससे दोनों फायदे दिखते हैं: मीडिया फोकस बनेगा और विपक्ष की एकता का प्रदर्शन होगा।
रिकॉर्ड की बातें — तारीखें और औपचारिकताएं
- उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी — मतदान 9 सितंबर 2025 को।
- नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि: 21 अगस्त 2025.
- दस्तावेज़ जांच: 22 अगस्त 2025. नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि: 25 अगस्त 2025.
गणित बताती है क्या?
उपराष्ट्रपति के लिए जीतने के लिये आवश्यक न्यूनतम मत: 391 (कुल प्रभावी सदस्यों की संख्या: 781)। वर्तमान में NDA गठबंधन के पास लगभग 422 सदस्यों का समर्थन है — जो अंकगणित के हिसाब से निर्णायक दिखता है। लेकिन इस चुनाव की खास बात यह है कि मतदान गुप्त होता है और विधायी नियमों के अनुसार पार्टी व्हिप (अनिवार्य मतदान निर्देश) लागू नहीं किया जा सकता — इसका अर्थ है कि क्रॉस-वोटिंग या बोगस वोट की सम्भावना शासन पक्ष के लिए चिंता का विषय बनी रहती है। विपक्ष तभी कुछ कर सकता है जब वह NDA के भीतर किसी टूट को भुना ले या कुछ सांसदों को क्रॉस-वोट करने के लिए प्रेरित कर सके।
सम्भावित परिदृश्य
- NDA क्लीन विन: यदि NDA एकजुट रहे और सभी समर्थक मतदान करें — जीत सहज।
- घरेलू दरार/क्रॉस-वोटिंग: कुछ सांसदों के अलग मतदान से वोट शेयर घट सकता है और मुकाबला कड़ा बन सकता है।
- समझौता बाद में: भाजपा पहले नाम घोषित करने के बाद विपक्ष अपना उम्मीदवार उतारे — मीडिया पर असर तो होगा, पर गणित यदि नहीं बदलेगा तो परिणाम पूर्वानुमेय रहेगा।
राजनीतिक मायने…
यह चुनाव केवल व्यक्ति चुनने का नहीं — यह गठबंधन क्षमता, अनुशासन और बैकचैनल कूटनीति का भी परीक्षण है। INDIA ब्लॉक का उद्देश्य सिर्फ एक संयुक्त नाम निकालना नहीं, बल्कि वोटिंग के दिन तक NDA को अस्थिर रखना भी है। दूसरी ओर NDA के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी एकजुटता बनाए रखे और किसी भी संभावित क्रॉस-वोटिंग को रोके — यहीं असली राजनीतिक युद्ध-क्षमता का माप होगा।
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