लेकिन रास्ते में ही टूट गई सांसें
स्कूल प्रशासन ने बच्ची को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे कार्डियक अरेस्ट बताया। प्राथमिक इलाज के बाद उसे सीकर रेफर किया गया, लेकिन अफसोस की बात है कि रास्ते में ही बच्ची की जान चली गई।
बदलती जीवनशैली से बच्चों में भी बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा?
डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों में हार्ट अटैक के मामले बेहद दुर्लभ होते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार गलत खानपान, मोबाइल की लत, मोटापा और एक्टिविटी की कमी जैसे कारण अब बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं।
क्या स्कूलों में जरूरी है कार्डियक एमरजेंसी सुविधा?
इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हर स्कूल में कार्डियक इमरजेंसी से निपटने के लिए जरूरी उपकरण, प्रशिक्षित स्टाफ और फर्स्ट रिस्पॉन्स सिस्टम नहीं होना चाहिए? यह केवल प्राची की कहानी नहीं है, यह देश के हर माता-पिता के दिल में डर बन गई है।
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