Chief Justice DY Chandrachud retirement: भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन एक भावुक और प्रेरणादायक संदेश दिया। अदालत कक्ष में वकीलों, कानूनी विशेषज्ञों और परिवार के सदस्यों से भरी सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “अगर मैंने कभी न्यायालय में किसी को ठेस पहुंचाई हो, तो कृपया मुझे माफ कर दीजिए।”(Chief Justice DY Chandrachud retirement) उन्होंने न्याय के प्रति अपने अडिग समर्पण और भावी सीजेआई, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के नेतृत्व में न्यायपालिका के उज्जवल भविष्य की उम्मीद जताई। सीजेआई के अंतिम कार्य दिवस पर उनके हल्के-फुल्के अंदाज और गहरे भावनाओं से भरे शब्दों ने सभी को अभिभूत कर दिया।
अगर मैंने कभी किसी को ठेस पहुंचाई हो, तो कृपया मुझे माफ करें’
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई), न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ ने 9 नवंबर 2024 को सर्वोच्च न्यायालय में अपने अंतिम कार्य दिवस पर भावुकता और सम्मान के साथ संबोधन किया। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने कभी किसी को न्यायालय में ठेस पहुंचाई हो, तो वे इसके लिए माफी मांगते हैं। सीजेआई ने अपने कार्यकाल के दौरान न्यायपालिका की स्थिरता और न्याय के प्रति अपने समर्पण की सराहना की और अपने उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के प्रति विश्वास जताया।
सीजेआई चंद्रचूड़ का न्यायपालिका के प्रति समर्पण
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि उनका न्यायपालिका में अनुभव एक ‘तीर्थयात्रा’ की तरह था, जिसमें उन्हें लगातार सीखने और समाज की सेवा करने का अवसर मिला। उन्होंने न्यायपालिका में अपने छोटे दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वे युवा थे, तो सर्वोच्च न्यायालय की आखिरी पंक्ति में बैठकर अन्य वकीलों और न्यायाधीशों से बहुत कुछ सीखा। उनका यह विश्वास था कि न्यायपालिका के प्रति यह अडिग समर्पण ही संस्था को मजबूत बनाता है और यह कार्य संस्थागत रूप से लगातार आगे बढ़ता रहता है।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की तारीफ
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने अगले सीजेआई न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की तारीफ करते हुए कहा कि वे एक स्थिर, ठोस और न्याय के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध व्यक्ति हैं। वे खुशी के साथ अपने पद से विदा ले रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि न्यायपालिका का नेतृत्व आने वाले समय में भी प्रभावी और समर्पित रहेगा।
समाज और न्यायपालिका के लिए योगदान
अपने कार्यकाल के दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ ने न्यायिक सुधारों और न्यायालय के कार्यभार को कम करने के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सीजेआई का पदभार संभाला था, तो 1,500 फाइलें लंबित पड़ी थीं, लेकिन उनके कार्यकाल के अंत तक 1.11 लाख मामले दर्ज किए गए और 5.33 लाख मामले सूचीबद्ध किए गए। इसके अलावा, उन्होंने अपंजीकृत मामलों की संख्या में भी कमी की।
सीजेआई का मजेदार अंदाज और ट्रोल्स पर कटाक्ष
सीजेआई चंद्रचूड़ ने अपने भाषण में हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वह ट्रोल्स पर कटाक्ष करते हुए यह कहते हैं कि जो लोग उनकी आलोचना करते थे, वे अब बेरोजगार हो जाएंगे, क्योंकि उनका सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें निशाना बनाने का कोई काम नहीं रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए न्यायाधीश के रूप में यह सबसे बड़ी संतुष्टि है कि उन्होंने समाज की सेवा की और जरूरतमंदों की मदद की।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की विदाई में भावुकता और सम्मान
सीजेआई चंद्रचूड़ के विदाई समारोह में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अन्य न्यायिक सहयोगी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सीजेआई की कार्यशैली और उनके योगदान को सम्मानित किया।
इस तरह, न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ का न्यायपालिका में लगभग दो दशकों का कार्यकाल एक प्रेरणा बनकर रहेगा, जो हमेशा भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक प्रमुख स्थान बनाए रखेगा।


















































