बेनामी संपत्ति का खेल खत्म! JDA ने लॉन्च किया नया डिजिटल सिस्टम, “अब सबकुछ होगा पारदर्शी

JDA: राजस्थान की राजधानी जयपुर, जिसे पिंक सिटी के नाम से जाना जाता है, वहां जमीनों की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी आम समस्या बन चुकी है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने और अवैध सौदों की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। (JDA Jaipur) इस समस्या पर लगाम कसने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है, जिससे अब जमीनों से जुड़ी हर जानकारी बस एक क्लिक में उपलब्ध होगी।

JDA का डिजिटल मास्टर प्लान

अब कोई भी व्यक्ति JDA की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर यह पता लगा सकता है कि कौन सा भूखंड किसके नाम पर है, पहले उसका मालिक कौन था और वर्तमान में उसकी स्थिति क्या है। JDA की इस पहल से फर्जी सौदों और जमीन से जुड़े घोटालों पर रोक लगेगी। खास बात यह है कि JDA अब हर भूखंड की पूरी कुंडली डिजिटल रूप में तैयार कर रहा है, जिससे भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सके।

JDA की इस नई व्यवस्था से जयपुर की रियल एस्टेट इंडस्ट्री में पारदर्शिता आएगी और लोग बिना किसी धोखाधड़ी के सुरक्षित तरीके से जमीन खरीद और बेच सकेंगे। अब सवाल यह है कि यह सिस्टम कितना प्रभावी रहेगा और क्या इससे जमीन माफियाओं की धांधली पर पूरी तरह रोक लग पाएगी?

अब ऑटो अपडेट होगा भूखंड मालिक का नाम

जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़ी धोखाधड़ी को रोकने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक नई डिजिटल प्रणाली विकसित की है। इस व्यवस्था के तहत अब जेडीए सीमा क्षेत्र में आने वाले भूखंडों की खरीद-बिक्री के बाद मालिक का नाम ऑटोमेटिक तरीके से अपडेट हो जाएगा।

कैसे होगा ऑटो अपडेट?

JDA के अधिकारियों के अनुसार, मास्टर प्लान 2025 के तहत जेडीए की वेबसाइट पर एक क्लिक में किसी भी भूखंड की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। भूखंड के मालिक का नाम ई-पंजीयन पोर्टल के जरिए सीपीआरएमएस (सेंट्रलाइज्ड प्रॉपर्टी रिपोजिटरी मैनेजमेंट सिस्टम) में दर्ज किया जाएगा।

भूखंड बेचने के बाद खरीदार का नाम ई-पंजीयन पोर्टल से स्वतः अपडेट हो जाएगा।

खरीदार को नाम हस्तांतरण के लिए अब जेडीए कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे।

भूखंड की रजिस्ट्री के पेपरों के सत्यापन के लिए जेडीए जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

फर्जी दस्तावेजों से नाम परिवर्तन की संभावनाओं पर पूरी तरह रोक लग सकेगी।

क्या होंगे इस नई व्यवस्था के लाभ?

इस नई प्रणाली से जयपुर के लोगों को भूखंड खरीदने और बेचने में अधिक पारदर्शिता और सुविधा मिलेगी।

फर्जीवाड़े पर रोक: अब किसी भी भूखंड को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम हस्तांतरण नहीं किया जा सकेगा।

समय की बचत: दस्तावेज सत्यापन और नाम हस्तांतरण के लिए जेडीए कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी।

ऑनलाइन सुविधा: पूरी प्रक्रिया डिजिटली ट्रैक की जा सकेगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी।

बिचौलियों से मुक्ति: लोगों को किसी भी तरह के बिचौलियों के झांसे में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

जल्द पूरी होगी प्रक्रिया

JDA आयुक्त आनंदी के अनुसार, 30 अप्रैल 2025 तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वर्तमान में जेडीए की आईटी टीम 90-ए पोर्टल, ई-पंजीयन पोर्टल और ई-धरती पोर्टल को एकीकृत करने में जुटी हुई है।

इस नई व्यवस्था से जयपुर में जमीन खरीद-बिक्री को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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Bodh Saurabh

Bodh Saurabh, a journalist from Jaipur, began his career in print media, working with Dainik Bhaskar, Rajasthan Patrika, and Khaas Khabar.com. With a deep understanding of culture and politics, he focuses on stories related to religion, education, art, and entertainment, aiming to inspire positive change through impactful reporting.

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