भारतीय नौसेना में ऐतिहासिक कमीशनिंग
INS तमाल का निर्माण रूस के कालिनिनग्राद स्थित यंतर शिपयार्ड में भारतीय विशेषज्ञों की प्रत्यक्ष निगरानी में हुआ। कमीशनिंग समारोह में पश्चिमी नौसेना कमान प्रमुख वाइस एडमिरल संजय जे. सिंह और भारत-रूस के वरिष्ठ रक्षा अधिकारी मौजूद रहे। यह युद्धपोत अब पश्चिमी नौसेना बेड़े का हिस्सा बनकर अरब सागर और पश्चिमी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।
तकनीकी विशेषताएं और आत्मनिर्भरता की झलक
- 30 नॉट्स (लगभग 55 किमी/घंटा) से अधिक गति
- स्टील्थ डिजाइन और रडार-चेतावनी से बच निकलने की क्षमता
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस
- मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर और एयर अर्ली वार्निंग सिस्टम की तैनाती
- आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट
खास बात यह है कि INS तमाल में करीब 26% स्वदेशी तकनीक का उपयोग हुआ है, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल, टॉरपीडो, अग्नि नियंत्रण प्रणाली और भारतीय रडार शामिल हैं।

‘मेक इन इंडिया’ का निर्णायक पड़ाव
2016 में हुए रक्षा समझौते के तहत ‘तुशील क्लास’ फ्रिगेट्स की श्रृंखला में INS तमाल दूसरा रूसी-निर्मित पोत है। अगले सभी युद्धपोत अब पूरी तरह भारतीय शिपयार्ड में बनेंगे, जिससे भारत की आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी। नौसेना अधिकारियों ने इसे ‘विदेशी निर्भरता के युग का समापन’ और ‘मेक इन इंडिया’ के लिए मील का पत्थर करार दिया।
#Tamal is the second ship of the Tushil Class, which are the upgraded versions of their predecessors, Talwar and Teg class frigates.
The ship, scheduled to be commissioned into the #IndianNavy on #01Jul 25, boasts significant upgrades in its arsenal in comparison to its… https://t.co/dGaMKTo7sP pic.twitter.com/VWDIIpts2y
— SpokespersonNavy (@indiannavy) June 26, 2025


















































