भारतीय समुद्री सीमा पर INS ‘तमाल’ की गड़गड़ाहट, ब्रह्मोस से दुश्मन होंगे चकनाचूर, वीडियो देखें

INS Tamal : मुंबई। भारतीय नौसेना ने आज अपनी समुद्री शक्ति में एक और मील का पत्थर जोड़ा, जब अत्याधुनिक स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS ‘तमाल’ को औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल किया गया। यह वह अंतिम बड़ा युद्धपोत है जिसे विदेशी शिपयार्ड में बनवाया गया है, और इसके बाद भविष्य में (INS Tamal )सभी युद्धपोत स्वदेशी शिपयार्ड में ही तैयार होंगे।

भारतीय नौसेना में ऐतिहासिक कमीशनिंग

INS तमाल का निर्माण रूस के कालिनिनग्राद स्थित यंतर शिपयार्ड में भारतीय विशेषज्ञों की प्रत्यक्ष निगरानी में हुआ। कमीशनिंग समारोह में पश्चिमी नौसेना कमान प्रमुख वाइस एडमिरल संजय जे. सिंह और भारत-रूस के वरिष्ठ रक्षा अधिकारी मौजूद रहे। यह युद्धपोत अब पश्चिमी नौसेना बेड़े का हिस्सा बनकर अरब सागर और पश्चिमी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।

‘तमाल’ नाम इंद्र की काल्पनिक तलवार से प्रेरित है, जो अजेय शक्ति और विजय का प्रतीक माना जाता है। इसका आदर्श वाक्य ‘सर्वदा सर्वत्र विजय’ और प्रतीकात्मक पहचान जाम्बवन्त एवं रूसी भालू से प्रेरित ‘ग्रेट बेयर्स’ है, जो भारत-रूस की रक्षा साझेदारी की मिसाल पेश करता है।

तकनीकी विशेषताएं और आत्मनिर्भरता की झलक

  • 30 नॉट्स (लगभग 55 किमी/घंटा) से अधिक गति
  • स्टील्थ डिजाइन और रडार-चेतावनी से बच निकलने की क्षमता
  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस
  • मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर और एयर अर्ली वार्निंग सिस्टम की तैनाती
  • आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट

खास बात यह है कि INS तमाल में करीब 26% स्वदेशी तकनीक का उपयोग हुआ है, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल, टॉरपीडो, अग्नि नियंत्रण प्रणाली और भारतीय रडार शामिल हैं।

INS Tamal

इस फ्रिगेट पर तैनात 250 से अधिक नौसैनिकों ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग और कालिनिनग्राद में कड़ाके की सर्दियों में कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह प्रशिक्षण जहाज के उन्नत सिस्टम और संचालन को बखूबी संभालने के लिए आवश्यक था।

‘मेक इन इंडिया’ का निर्णायक पड़ाव

2016 में हुए रक्षा समझौते के तहत ‘तुशील क्लास’ फ्रिगेट्स की श्रृंखला में INS तमाल दूसरा रूसी-निर्मित पोत है। अगले सभी युद्धपोत अब पूरी तरह भारतीय शिपयार्ड में बनेंगे, जिससे भारत की आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी। नौसेना अधिकारियों ने इसे ‘विदेशी निर्भरता के युग का समापन’ और ‘मेक इन इंडिया’ के लिए मील का पत्थर करार दिया।

INS तमाल के कमीशनिंग से भारतीय नौसेना की समुद्री उपस्थिति और सुरक्षा रणनीति को ठोस बढ़ावा मिलेगा। यह जहाज न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत-रूस दीर्घकालिक रक्षा सहयोग का भी प्रतीक है।  अपडेट्स के लिए जुड़े रहें  www.bodhsaurabh.com
 

Bodh Saurabh Web Team

Bodh Saurabh is an experienced Indian journalist and digital media professional, with over 14 years in the news industry. He currently works as the Assistant News Editor at Bodh Saurabh Digital, a platform known for providing breaking news and videos across a range of topics, including national, regional, and sports coverage.

Related Posts

रिश्ते, भरोसे और खौफनाक आरोपों की कहानी! केतन अग्रवाल केस में सिया गोयल के माता-पिता ने तोड़ी चुप्पी

Ketan Agarwal…

1975 का डर आज भी जिंदा? जानिए अगर अब कोई सरकार इमरजेंसी लगाए तो संविधान क्या कहता है

44th Constitutional…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *