यूरिया से बिगड़ा संतुलन, मिट्टी से गायब पोषण—ICRIER रिपोर्ट ने बताया भारत क्यों झेल रहा हिडन हंगर

ICRIER Report: नई दिल्ली।भारत में कुपोषण की तस्वीर अक्सर खाली थाली से जोड़ी जाती है, लेकिन अब सच्चाई इससे कहीं गहरी और डराने वाली है। थाली में खाना होने के बावजूद शरीर तक पोषण नहीं पहुंच पा रहा—और इसकी वजह न गरीबी है, न भूख, बल्कि हमारी बीमार होती मिट्टी। खेत, जो कभी अन्नदाता थे, आज खुद पोषण के संकट से जूझ रहे हैं।

ICRIER की ताज़ा रिपोर्ट ने इस छुपे हुए खतरे से पर्दा उठाया है, जहां नाइट्रोजन, जिंक और कार्बन जैसे जरूरी तत्व मिट्टी से गायब हो रहे हैं। इसका असर सिर्फ फसलों पर नहीं, बल्कि देश के बच्चों के भविष्य, (ICRIER Report) स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था तक पर पड़ रहा है। सवाल अब सिर्फ खेती का नहीं, बल्कि यह है—क्या भारत हिडन हंगर की उस लड़ाई में उतर चुका है, जहां पेट भरा है लेकिन शरीर कमजोर?

मिट्टी से गायब हो रहे पोषक तत्व

ICRIER की पॉलिसी ब्रीफ के मुताबिक, भारत की कृषि भूमि से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, जिंक और कार्बन जैसे अहम पोषक तत्व तेजी से खत्म हो रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि गेहूं, चावल और दाल जैसी मुख्य फसलों में पोषण स्तर लगातार गिर रहा है। रिपोर्ट बताती है कि देश की 73 से 76 प्रतिशत मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन 0.5 फीसदी या उससे भी कम रह गया है, जबकि यही तत्व मिट्टी की जान माना जाता है।

जब मिट्टी कमजोर होती है, तो फसल भी कमजोर होती है

विशेषज्ञों के अनुसार, ऑर्गेनिक कार्बन की कमी से मिट्टी की पानी और पोषक तत्वों को पकड़ने की क्षमता घट जाती है। इसका असर सीधे फसल की गुणवत्ता पर पड़ता है। यानी पेट भरा हो सकता है, लेकिन शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पा रहा—इसी को ‘हिडन हंगर’ कहा जाता है।

रासायनिक उर्वरकों ने बिगाड़ा संतुलन

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि यूरिया सब्सिडी और रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित इस्तेमाल ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। जहां NPK का आदर्श अनुपात 4:2:1 होना चाहिए था, वह बढ़कर 10.9:4.4:1 तक पहुंच गया है। देश के कई हिस्सों में नाइट्रोजन की कमी 90 प्रतिशत तक दर्ज की गई है, जबकि जिंक में 35 फीसदी और आयरन में 24 फीसदी की गिरावट आई है।

पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों में वर्षों से रासायनिक खाद के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण मिट्टी का ऑर्गेनिक कार्बन स्तर वैश्विक औसत से भी नीचे चला गया है।

ICRIER ने इस संकट से निपटने के लिए सरकार को कई अहम सुझाव दिए हैं। इनमें मिट्टी में कार्बन बढ़ाने पर फोकस, यूरिया सब्सिडी की जगह बायो-फर्टिलाइजर को बढ़ावा, पोषक तत्वों से भरपूर फसलों का बायोफोर्टिफिकेशन और NPK संतुलन को सुधारना शामिल है।

कुपोषण से लड़ाई खेत से शुरू होगी

विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अगर इस मिट्टी संकट को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत में कुपोषण और गहराएगा। बच्चों से लेकर वयस्कों तक, सभी के आहार में पोषण की कमी बढ़ेगी। ऐसे में सरकार, किसान और वैज्ञानिकों को मिलकर काम करना होगा, क्योंकि मजबूत भारत की नींव थाली से पहले खेत में तैयार होती है।

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Bodh Saurabh Web Team

Bodh Saurabh is an experienced Indian journalist and digital media professional, with over 14 years in the news industry. He currently works as the Assistant News Editor at Bodh Saurabh Digital, a platform known for providing breaking news and videos across a range of topics, including national, regional, and sports coverage.

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