महिलाओं के त्यौहार की तैयारी में पतिदेव की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। कभी प्यार और मनुहार, कभी हल्की नाराजगी — इन सबके बाद ही पतिदेव त्यौहार में शामिल होते हैं। महिलाएं बताती हैं कि यह प्रक्रिया भक्ति और उत्साह दोनों को जोड़ती है।
लेखिका अंजू अग्रवाल के अनुसार, मां लक्ष्मी को खुश करने से पहले घर की लक्ष्मी यानी परिवार और पत्नी की छोटी-छोटी ख्वाहिशें पूरी करना जरूरी है। आर्थिक और भावनात्मक सहयोग, जैसे क्रेडिट कार्ड खर्च, पर्स और अन्य छोटे खर्च, त्यौहार की समृद्धि सुनिश्चित करते हैं।
घर को सजाना, पकवान बनाना और रीति-रिवाजों का पालन करना महिलाओं के त्यौहार का मुख्य हिस्सा है। दीपक और सजावटी सामान फुटपाथ की दुकानों से लेकर घर तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी महिलाओं के कंधों पर रहती है। साथ ही सुरक्षा और सावधानी का ध्यान रखना भी अनिवार्य है।
महिलाओं की मेहनत, भक्ति और सजगता से दीपावली का पर्व घर में खुशियों और आस्था का संगम बन जाता है। घर की लक्ष्मी खुश रहती हैं, तब माता लक्ष्मी का आगमन निश्चित माना जाता है।इस माध्यम से यह संदेश जाता है कि दीपावली केवल रोशनी और पकवान का त्योहार नहीं, बल्कि परिवार, सहयोग और भक्ति का पर्व भी है। महिलाओं की भूमिका इस त्योहार को सफल और सार्थक बनाने में अहम है।

Guest Article लेखिका अंजू अग्रवाल
Disclaimer: यह Guest Article Editorial सांस्कृतिक और पारंपरिक जानकारी पर आधारित है। इसे केवल सूचना और आस्था के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है।
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