यह कोई मंदिर नहीं, बल्कि पूरा गांव ही देवी-देवताओं का घर है…. सच्चाई जानकर रह जाएंगे दंग!

Dungarpur News: राजस्थान में एक ऐसा दिव्य स्थल है, जो केवल श्रद्धा और आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि एक रहस्यमयी आध्यात्मिक धरोहर भी है। यह स्थान है बेणेश्वर धाम, जहां प्रकृति और धर्म का अनोखा संगम देखने को मिलता है।

सोम, माही और जाखम नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर स्थित यह स्थान संत मावजी की तपोभूमि माना जाता है। यहां श्रीराधाकृष्ण मंदिर, ब्रह्मा मंदिर, शिव मंदिर, वाल्मीकि मंदिर और गायत्री मंदिर के साथ अन्य देवी-देवताओं का वास है। दिलचस्प बात यह है कि यह क्षेत्र राजस्व रिकॉर्ड में “गैर आबादी राजस्व गांव” के रूप में दर्ज है, (Dungarpur News) क्योंकि यह तीनों ओर से मत्स्याकार टापू के रूप में स्थित है। यानी यह स्थान आधिकारिक रूप से किसी भी इंसानी बस्ती के लिए चिन्हित नहीं है, फिर भी यहां अतिक्रमण और अवैध निर्माण बढ़ते जा रहे हैं, जिन पर प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा।

क्या यह केवल आस्था का केंद्र है, या इसके पीछे कोई रहस्य भी छिपा है? बेणेश्वर धाम का यह अद्भुत स्वरूप और इससे जुड़े रोचक पहलू जानने के लिए आगे पढ़ें!

बेणेश्वर धाम: गैर आबादी वाला राजस्व गांव घोषित

राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, सदियों से इस पवित्र स्थल पर कोई आवास नहीं था, बल्कि यहां केवल देवी-देवताओं के आस्था केंद्र ही मौजूद थे। प्रशासन ने इस क्षेत्र को गैर आबादी वाला राजस्व गांव घोषित कर पंचायत दौलपुरा में सुरक्षित रखा है। दिलचस्प बात यह है कि पंचायत भी यहां किसी के नाम पर पट्टे आवंटित नहीं कर सकती, जिससे यह आधिकारिक रूप से आबादी रहित क्षेत्र बना हुआ है।

बेणेश्वर धाम के लिए 255 करोड़ का मास्टर प्लान

वर्ष 2015-16 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने बेणेश्वर धाम के विकास के लिए 255 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान तैयार किया था। इस योजना के तहत राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं मेला प्राधिकरण और देवस्थान विभाग द्वारा टापू की जमीन का सर्वे कराया गया था। हालांकि, राजस्व रिकॉर्ड में भूमि का सही इंद्राज नहीं होने के कारण इसे पहले गैर आबादी वाला गांव घोषित किया गया और बाद में इसे दौलपुरा पंचायत में दर्शाया गया।

धाम का क्षेत्रफल लगातार घट रहा

राजस्व आंकड़ों के अनुसार, 2015-16 के सर्वेक्षण में बेणेश्वर धाम टापू की कुल जमीन 80.75 हेक्टेयर दर्ज थी, जबकि 2024 के सर्वेक्षण में यह घटकर 76.33 हेक्टेयर रह गई। यानी बीते आठ वर्षों में लगभग 4.5 हेक्टेयर क्षेत्रफल कम हो गया है। इसके पीछे अवैध निर्माण और नदियों के कटाव को बड़ी वजह माना जा रहा है। हालांकि, मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए प्रदेश सरकारों ने कई मास्टर प्लान तैयार किए, लेकिन हर बार सरकार बदलने के साथ ही योजनाएं भी ठंडे बस्ते में चली गईं।

अवैध अतिक्रमणों पर होगी कार्रवाई

बेणेश्वर धाम चारों तरफ से जल से घिरा हुआ क्षेत्र है, जो बारिश के दौरान टापू का रूप ले लेता है। पहले यहां पुल भी नहीं थे, जिससे आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाती थी। हालांकि, अब भी साल में दो से तीन बार यह क्षेत्र टापू बन जाता है। इसी कारण इसे गैर आवासीय क्षेत्र घोषित किया गया है। लेकिन इसके बावजूद अवैध अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं। प्रशासन ने इन अवैध कब्जों पर जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। नारायणलाल डामोर, तहसीलदार, साबला: “क्षेत्र में हो रहे अवैध अतिक्रमणों को लेकर प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।”

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Bodh Saurabh

Bodh Saurabh, a journalist from Jaipur, began his career in print media, working with Dainik Bhaskar, Rajasthan Patrika, and Khaas Khabar.com. With a deep understanding of culture and politics, he focuses on stories related to religion, education, art, and entertainment, aiming to inspire positive change through impactful reporting.

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