भाभा की मौत के बाद क्यों धीमी पड़ी भारत की परमाणु रफ्तार, जानिए अनकही कहानी

Bhabha Plane Crash: नई दिल्ली। भारत के परमाणु कार्यक्रम के भीष्म पितामह डॉ. होमी जहांगीर भाभा की पुण्यतिथि आज भी देश को एक अनुत्तरित सवाल के सामने खड़ा कर देती है—क्या 24 जनवरी 1966 को हुआ विमान हादसा सिर्फ दुर्घटना था, या भारत के एटमी भविष्य को रोकने की सोची-समझी चाल?

वह काली सुबह, जब आसमान में थम गई कंचनजंघा

जनवरी 1966 की बर्फीली सुबह। एयर इंडिया की फ्लाइट 101, जिसे ‘कंचनजंघा’ नाम दिया गया था, मुंबई से लंदन के लिए रवाना हुई। विमान में 117 लोग सवार थे, जिनमें भारत के सबसे बड़े वैज्ञानिक डॉ. होमी भाभा भी शामिल थे।

जेनेवा में लैंडिंग से कुछ मिनट पहले ही यह विमान फ्रेंच आल्प्स की माउंट ब्लांक चोटी से टकरा गया। 4,677 मीटर की ऊंचाई पर हुई इस टक्कर ने पल भर में सब कुछ खत्म कर दिया। विमान में सवार सभी यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई।

यह हादसा ऐसे समय हुआ जब देश पहले ही प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में हुई रहस्यमयी मौत से उबर भी नहीं पाया था।

वैज्ञानिक नहीं, एक राष्ट्र निर्माता थे होमी भाभा

30 अक्टूबर 1909 को जन्मे डॉ. भाभा केवल प्रयोगशाला तक सीमित वैज्ञानिक नहीं थे। उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर वैज्ञानिक शक्ति बनाने का सपना देखा। TIFR और BARC जैसी संस्थाएं उनकी दूरदृष्टि का परिणाम थीं।

1965 में दिया गया उनका एक बयान आज भी दुनिया को चौंकाता है—“अगर सरकार अनुमति दे, तो भारत 18 महीने में परमाणु बम बना सकता है।” यह आत्मविश्वास वैश्विक ताकतों के लिए खतरे की घंटी बन गया था।

दुर्घटना या अंतरराष्ट्रीय साजिश?

हालांकि आधिकारिक रिपोर्ट में हादसे की वजह पायलट की गलती और तकनीकी खामी बताई गई, लेकिन कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।

1. CIA कनेक्शन की थ्योरी

2008 में प्रकाशित किताब Conversations with the Crow में पूर्व CIA अधिकारी रॉबर्ट क्राउली के हवाले से दावा किया गया कि भारत के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए विमान के कार्गो सेक्शन में विस्फोट कराया गया। इस दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी।

2. मलबे ने बढ़ाया शक

हादसे का मलबा मुख्य टक्कर स्थल से काफी दूर बिखरा मिला। 2017 में एक स्विस पर्वतारोही को मिले अवशेषों ने यह सवाल खड़ा किया कि ईंधन से भरे विमान में आग क्यों नहीं लगी?

 

Bhabha Plane Crash

मौत के बाद भी जीवित रहा उनका सपना

डॉ. भाभा भले ही असमय चले गए, लेकिन उनका सपना नहीं मरा। 1974 में पोखरण में भारत का पहला परमाणु परीक्षण उसी नींव पर खड़ा था, जो उन्होंने रखी थी। आज भारत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र है, और इसके हर कदम में डॉ. होमी भाभा की सोच, साहस और दृष्टि शामिल है।

एक मौत, जो आज भी सवाल पूछती है

डॉ. भाभा की पुण्यतिथि केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि यह याद दिलाने का दिन है कि कुछ मौतें इतिहास बदल देती हैं—और कुछ सवाल समय के साथ और गहरे हो जाते हैं।

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Bodh Saurabh Web Team

Bodh Saurabh is an experienced Indian journalist and digital media professional, with over 14 years in the news industry. He currently works as the Assistant News Editor at Bodh Saurabh Digital, a platform known for providing breaking news and videos across a range of topics, including national, regional, and sports coverage.

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