Uddhav Thackeray: मुंबई।शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र की मूल भावना और स्वतंत्रता को कमजोर किया जा रहा है। ठाकरे की यह टिप्पणी तब आई है जब विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके नेता हिरासत में लिए गए हैं।
क्या है अधिकार क्षेत्र की सीमा?
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग के आचरण पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट से बड़ा है? उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ऐसे कदम उठा रहा है जैसे उसकी शक्ति राष्ट्रपति से भी ऊपर हो। ठाकरे ने कहा कि वे देखना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या निर्णय देता है।
लोकतंत्र को खतरा
ठाकरे ने भाजपा पर पिछले लोकसभा चुनावों में वोट चोरी का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि बिहार चुनावों में भी ऐसी ही धांधली हो सकती है। उन्होंने एक बार भाजपा के भीतर एक नेता द्वारा शिवसेना को ईवीएम हैकिंग के तरीके दिखाने का भी उल्लेख किया, हालांकि उन्होंने उस नेता का नाम उजागर नहीं किया।
केंद्र सरकार पर तीखा हमला
ठाकरे ने केंद्र सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं की हिरासत और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान की गई कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों को झूठे आश्वासन देकर हिरासत में लिया गया, जो लोकतंत्र के खिलाफ है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा अपने क्षेत्र में मतदाताओं के नाम हटाने की बात का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी में ऐसे लोग हो सकते हैं जो 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत नहीं चाहते, और सरकार को इस पर नियंत्रण रखना चाहिए।
वीवीपीएटी प्रणाली पर बड़ा संकेत
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग द्वारा स्थानीय निकाय चुनावों में वीवीपीएटी (वोटर-वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) को समाप्त करने की योजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह कदम चुनाव की पारदर्शिता को नुकसान पहुंचा सकता है और मतदाताओं के विश्वास को हिला सकता है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के इस बयान से चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों की नीतिगत आलोचना और तेज हो सकती है। लोकतंत्र की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर यह बयान राजनीतिक जगत में नई बहस को जन्म देगा।
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