अयोध्या में पहली बार इतना विशाल ध्वजारोहण, संतों ने कहा….“सनातन का वैश्विक संदेश

Ayodhya News: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर मंगलवार को आयोजित ध्वजारोहण समारोह ने एक बार फिर साबित किया कि यह शहर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति और एकता का धड़कता हुआ प्रतीक बन चुका है। इस ऐतिहासिक क्षण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने कार्यक्रम के महत्व को कई गुना बढ़ा दिया।

उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस आयोजन में 500 से अधिक स्थानीय कलाकारों ने वह प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने अयोध्या को एक विशाल सांस्कृतिक मंच में बदल दिया। (Ayodhya News )लोक परंपराओं और क्षेत्रीय नृत्यों के रंगों में सजा यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं था—यह भारत की विविधता और एकता का सशक्त प्रदर्शन था।

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ब्रज, बुंदेलखंड, अवध, तराई… अयोध्या बनी सांस्कृतिक महासंगम

मथुरा का मयूर नृत्य हो, झांसी का राई नृत्य या गोरखपुर का वनटांगिया—प्रदेश के हर क्षेत्र की विरासत इस मंच पर जीवंत हो उठी। सोनभद्र के करमा-बारहसिंहा और अयोध्या के फरुवाही-बधावा जैसे लोकनृत्यों ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

“धर्म ध्वजा केवल लहराई नहीं, सनातन की वैश्विक प्रतिष्ठा भी स्थापित हुई”

समारोह में उपस्थित साधु-संतों ने ध्वजारोहण को केवल एक रस्म नहीं, बल्कि ‘सनातन विजय’ का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह उन सैकड़ों वर्षों की आस्था और संघर्ष का प्रतिफल है, जिसे समाज ने निरंतर जीवित रखा। उनके अनुसार यह ध्वजा भारत की आध्यात्मिक शक्ति का संदेश पूरे विश्व को देती है।

 ‘सनातन परंपरा के रक्षक’

राम वैदेही मंदिर के संत दिलीप दास ने कहा कि अयोध्या आज जो रूप देख रही है, वह अयोध्या मिशन की दूरदर्शिता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रमाण है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अयोध्या को फिर से धर्म और संस्कृति का केंद्र बना दिया है। ध्वजारोहण कार्यक्रम के साथ ही विवाह पंचमी के अवसर पर श्रीराम और माता जानकी के दिव्य विवाह पर्व का पूजन-अर्चन भी किया गया, जिसने वातावरण को और अधिक भक्ति और उत्साह से भर दिया।

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