RSS Meeting: नई दिल्ली। अमेरिका की नई टैरिफ नीति को केवल व्यापारिक कदम नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत की आर्थिक संप्रभुता पर चोट के रूप में देखा जा रहा है। इसी को देखते हुए संघ और जुड़े संगठनों ने दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की है, जिसमें इस नीति के लघु और दीर्घकालिक (RSS Meeting) प्रभावों का विश्लेषण किया जाएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं उत्पादन प्रणाली की सुरक्षा के उपाय तय किए जाएंगे।
सामूहिक आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण
इस बैठक में लघु उद्योग भारती, सहकार भारती, भारतीय मजदूर संघ, स्वदेशी जागरण मंच और किसान संघ जैसे प्रमुख संगठन भाग लेंगे। इन संगठनों की भागीदारी यह दर्शाती है कि संघ इस मुद्दे को सिर्फ राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देख रहा, बल्कि व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बना रहा है।
संभावित राजनीतिक सहभागिता
सूत्रों के अनुसार, बैठक में केंद्र सरकार के कुछ मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी शामिल हो सकते हैं। आमतौर पर संघ की आर्थिक बैठकें तकनीकी और संगठनात्मक स्तर पर होती हैं, लेकिन इस बार बैठक की संवेदनशीलता और स्तर इसे विशेष बना रही है।
‘ऑर्गनाइज़र’ में अमेरिका पर तीखा प्रहार
संघ के मुखपत्र ‘ऑर्गनाइज़र’ में हाल ही में अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा गया कि लोकतंत्र और स्वतंत्रता की दुहाई देने वाला अमेरिका, वास्तव में वैश्विक तानाशाही और आर्थिक आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। लेख में यह भी उल्लेख किया गया कि टैरिफ और व्यापार युद्ध अब भू-राजनीतिक नियंत्रण के नए औजार बन चुके हैं, जिनका इस्तेमाल भारत जैसे विकासशील देशों की संप्रभुता को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। इस बैठक के परिणाम और निर्णय देश की आर्थिक नीति और भविष्य की रणनीति पर महत्वपूर्ण असर डाल सकते हैं।
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