दिवाली पर लक्ष्मी आरती को लेकर मतभेद
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात लक्ष्मी आरती नहीं करनी चाहिए क्योंकि आरती के बाद लोग उठकर चले जाते हैं। इससे देवी को ऐसा लगता है जैसे उनकी विदाई हो रही हो। मान्यता है कि इस स्थिति में लक्ष्मी घर से प्रस्थान कर जाती हैं, जिससे आर्थिक तंगी या धन की कमी आ सकती है।
आरती क्यों नहीं करनी चाहिए
- देवी लक्ष्मी का प्रस्थान: आरती के बाद उठकर चले जाना, देवी के प्रस्थान का प्रतीक माना जाता है।
- शांति का अभाव: देवी लक्ष्मी को शांति प्रिय माना गया है; घंटियों और शंख की ध्वनि उन्हें बेचैन कर सकती है।
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विदाई का संकेत: आरती सामान्यतः पूजा के अंत में की जाती है — जिसे विदाई का प्रतीक माना जाता है।
लक्ष्मी आरती के बजाय क्या करें?
धनतेरस और दिवाली के दिन आप देवी लक्ष्मी की आरती करने की बजाय उनका नाम जप करें, मंत्रों का पाठ करें या लक्ष्मी चालीसा पढ़ें। साथ ही, भगवान गणेश और विष्णु की आरती करना शुभ फलदायक माना गया है।
इस दिन देवी को फूल, फल, मिठाई और दीपदान अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है। इससे घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
सच्ची भक्ति का अर्थ
दिवाली का पर्व केवल धन और सौभाग्य का प्रतीक नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और भावनात्मक शुद्धता का प्रतीक भी है। देवी लक्ष्मी के प्रति सच्ची भक्ति का अर्थ केवल विधि-विधान नहीं, बल्कि मन की पवित्रता और सत्कर्मों में निहित है।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल आस्था और जनजागरण है, वैज्ञानिक प्रमाणित नहीं। पाठक इसे अपनी आस्था के अनुसार ग्रहण करें।
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