Vice President Election: उपराष्ट्रपति पद के लिए मंगलवार (9 सितम्बर 2025) को संसद भवन में मतदान रखा गया है। मतदान सुबह 10 बजे शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलेगा। मतगणना शाम 6 बजे से शुरू होने की संभावना है और देर शाम तक परिणाम घोषित कर दिया जाएगा ….यानि आज ही यह तय हो जाएगा कि (Vice President Election) भारत का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा।
मुकाबला और प्रक्रिया
इस चुनाव में NDA की ओर से C.P. राधाकृष्णन और विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. की ओर से B. सुदर्शन रेड्डी मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं। उपराष्ट्रपति चुनाव केवल संसद के सदस्यों द्वारा होता है — लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित व मनोनीत सांसद ही वोट डालते हैं। मतदान गुप्त मत और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) प्रणाली के तहत होगा, जिससे प्राथमिकता के अनुरूप मतों का पुनर्वितरण संभव है।
समय-सारणी और नाटकीयता
चूँकि मतदान और मतगणना एक ही दिन होते हैं, राजनीतिक नाटकीयता और प्रतिक्रियाएँ तात्कालिक होंगी। सुबह से संसद के भीतर जोश और घनघोर रणनीति दिखेगी — और शाम होते-होते नतीजे नेक्स्ट पॉलिटिकल चॅप्टर की दिशा तय करेंगे।
अब तक 14 उपराष्ट्रपतियों की सेवा
यह पद अब तक 14 लोगों ने सुशोभित किया। समय के साथ उपराष्ट्रपति का रिकॉर्ड और उनके कार्यकालों की पारंपरिक महत्ता देश की संसदीय स्थिरता का भी आइना रहा है। सबसे लंबे कार्यकाल के मामले में दो नाम उभरकर आते हैं — डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और एम. हामिद अंसारी — जिन्होंने लगभग 10 वर्ष तक यह पद संभाला।
भारत के उपराष्ट्रपतियों की सूची (क्रमवार)
- डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन — 13 मई 1952 से 12 मई 1962
- डॉ. जाकिर हुसैन — 13 मई 1962 से 12 मई 1967
- वी. वी. गिरि — 13 मई 1967 से 3 मई 1969
- गोपाल स्वरूप पाठक — 31 अगस्त 1969 से 30 अगस्त 1974
- बी. डी. जत्ती — 31 अगस्त 1974 से 30 अगस्त 1979
- एम. हिदायतुल्लाह — 31 अगस्त 1979 से 30 अगस्त 1984
- आर. वेंकटरमन — 31 अगस्त 1984 से 24 जुलाई 1987
- डॉ. शंकर दयाल शर्मा — 3 सितंबर 1987 से 24 जुलाई 1992
- के. आर. नारायणन — 21 अगस्त 1992 से 24 जुलाई 1997
- कृष्णकांत — 21 अगस्त 1997 से 27 जुलाई 2002
- भैरों सिंह शेखावत — 19 अगस्त 2002 से 21 जुलाई 2007
- एम. हामिद अंसारी — 11 अगस्त 2007 से 10 अगस्त 2017
- एम. वेंकैया नायडू — 11 अगस्त 2017 से 10 अगस्त 2022
- जगदीप धनखड़ — 11 अगस्त 2022 से 21 जुलाई 2025
नई राजनीति पर संभावित प्रभाव
उपराष्ट्रपति का चुनाव केवल औपचारिक नियुक्ति नहीं; यह संसद के भीतर शक्ति-संतुलन, छोटे दलों की अहमियत और भावी संसदीय कार्यों के टोन को प्रभावित कर सकता है। खासकर यदि विजेता किसी गठबंधन के अपेक्षित उम्मीदवार से अलग हुआ तो आने वाले महीनों में गठबंधन-नीति और संसदीय रणनीतियों में बदलाव आना संभावित है।
क्या देखें….आज की निगाहें
- संसद में वोटिंग प्रतिशत और अनुपस्थित सांसदों की संख्या
- क्या पहला चरण किसी के लिए स्पष्ट बहुमत देगा या STV के ट्रांसफर सक्रिय होंगे
- परिणाम के तुरंत बाद राजनीतिक दलों के बयान और गठबंधन रणनीतियाँ


















































