कौन करता है मतदान
उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट केवल संसद के सदस्यों के द्वारा डाले जाते हैं — लोकसभा और राज्यसभा दोनों के निर्वाचित व मनोनीत सांसद शामिल होते हैं। राष्ट्रपति चुनाव के विपरीत, यहाँ राज्य विधानसभाएँ मतदाता नहीं हैं। हर सांसद का वोट बराबर मना जाता है, इसलिए प्रत्येक वोट की समान राजनीतिक महत्वता रहती है।
कुल मतदाता….वास्तविक संख्या का असर
साल 2025 में कुल लगभग 782 सांसद मतदान करेंगे — इस संख्या में रिक्तियों के कारण थोड़ी उतार-चढ़ाव संभव है। चूंकि वोटों की कुल संख्या सीमित है, इसलिए छोटे दलों व निर्दलीयों के एक-एक वोट का महत्व बढ़ जाता है और वहीँ अचानक हुए पाले बदलों का असर निर्णायक हो सकता है।
सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV)
यह चुनाव गुप्त मतदान और STV पद्धति पर चलता है। सांसद बैलेट पर उम्मीदवारों को प्राथमिकता के क्रम में (1,2,3…) अंक देते हैं। यदि किसी को पहले चरण में 50%+ वोट मिल जाएँ तो वह विजयी; नहीं तो सबसे कम वोट पाने वाले को बाहर कर, उसकी दूसरी पसंदों में ट्रांसफर की जाती हैं। यह प्रणाली केवल बहुमत नहीं, बल्कि प्रत्याशियों के बीच व्यापक समर्थन और समझौते की भी कसौटी है।
चुनाव आयोग ने 7 अगस्त 2025 को अधिसूचना जारी कर नामांकन प्रक्रिया शुरू की; नामांकन की अंतिम तिथि 21 अगस्त और नाम वापसी 25 अगस्त निर्धारित रही। नामांकन के लिए कम से कम 20 सांसदों के प्रस्ताव और 20 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है — यानी कुल 40 सांसदों का समर्थन अनिवार्य है।
क्रॉस-वोटिंग…मनोनीत सांसद
इस चुनाव का निर्णायक पहलू क्रॉस-वोटिंग का खतरा और मनोनीत सांसदों की भूमिका है। छोटे दल, क्षेत्रीय गठबंधन और मनोनीत सदस्य अक्सर पार्टी लाइन से अलग मानवीय या रणनीतिक निर्णय कर सकते हैं — और STV के ट्रांसफर चरण में उनका वोट किसी भी प्रत्याशी के पलड़े को भारी कर सकता है।
एक ही दिन मतदान व परिणाम
9 सितंबर को सुबह से शाम तक वोटिंग और तत्क्षणी मतगणना होने के कारण नतीजे उसी रात आ जाएंगे। यह तात्कालिक परिणाम राजनीतिक प्रतिक्रिया, बयानबाज़ी और संसदीय रणनीतियों को तुरंत प्रभावित करेंगे — खासकर यदि परिणाम अपेक्षा से अलग रहे तो गठबंधन-बदल और अगली कार्यवाही तीव्र हो सकती है।
क्या देखें (What to watch)
- दिन के अन्त तक कितनी उपस्थिति (quorum) दर्ज होती है और कितने सांसद अनुपस्थित रहते हैं।
- किस हद तक छोटे दलों और निर्दलीयों का वोट प्रत्याशियों की उम्मीदों को बदलता है।
- यदि पहला चरण किसी के लिए स्पष्ट बहुमत नहीं ला पाता तो STV के ट्रांसफर कितने चरण लेते हैं।
- मतगणना के तुरंत बाद राजनीतिक दलों के बयान और संसदीय कार्यसूची पर प्रभाव।
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 सिर्फ एक संवैधानिक नियुक्ति नहीं बल्कि संसद के भीतरी समीकरणों की परीक्षा है …जहाँ गणित, व्यक्तिगत विवेक और राजनीतिक रणनीति साथ-साथ निर्णायक बनेंगी। चुनावी नतीजा चाहे जैसा भी हो, वह आने वाले महीनों में संसदीय राजनीति और गठबंधन समीकरणों पर असर डालेगा।


















































