आश्विन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण, भारत रहेगा अछूता, विदेशों में राजनीति और अर्थव्यवस्था पर गहरे असर की चेतावनी

Sarv Pitru Amavasya: जयपुर। आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या, जिसे देव पितृ अमावस्या भी कहा जाता है, इस बार एक विशेष खगोलीय घटना की साक्षी बनेगी। रविवार को खंडग्रास सूर्य ग्रहण रहेगा, जो भारतीय समय अनुसार रात 11 बजे से प्रारंभ होकर सुबह 3 बजकर 24 मिनट तक चलेगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और न ही यहां कोई धार्मिक प्रभाव डालेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भारत में सूतक नियम मान्य नहीं होंगे। (Sarv Pitru Amavasya)इस कारण से सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों के श्राद्ध-कर्म में कोई बाधा नहीं होगी।

विदेशों में रहेगा पूर्ण प्रभाव

ज्योतिषाचार्य पं अक्षय शास्त्री  ने बताया कि यह सूर्य ग्रहण न्यूजीलैंड, पूर्वी मेलनेसिया, दक्षिण पोलेसिया, पश्चिम अंटार्कटिका और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में पूरी तरह प्रभावी रहेगा। इन देशों में रात के समय यह ग्रहण लगभग 4 घंटे 24 मिनट तक दिखाई देगा।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह विशेष ग्रहण शुभ संकेत भी ला सकता है और चुनौतियां भी। पिछले एक पखवाड़े में हुए चंद्र ग्रहण और अब सूर्य ग्रहण से विश्व के आर्थिक, राजनीतिक और प्राकृतिक हालात प्रभावित हो सकते हैं। कृषि, उद्योग, शिक्षा और मौसम चक्र पर भी इसके असर की आशंका जताई जा रही है।

पितृ पक्ष की तिथियों में कोई बाधा नहीं

ज्योतिषियों का मानना है कि एक ही पखवाड़े में चंद्र और सूर्य ग्रहण होना विशेष खगोलीय संकेत है। हालांकि, इस बार पितृ पक्ष की तिथियों पर ग्रहण का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। श्रद्धालु पूर्वजों की स्मृति में श्राद्ध और तर्पण कर्म निर्विघ्न कर सकते हैं।

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Bodh Saurabh Web Team

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