Rajasthan water rates hike: राजस्थान के शहरों में पानी का बहाव अब महज नलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जेबों में भी हलचल मचाने को तैयार है। जलदाय विभाग ने पानी की दरों में इजाफा करने और 15,000 लीटर तक फ्री पानी देने की योजना पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। (Rajasthan water rates hike)यह कदम न केवल लोगों की दिनचर्या पर असर डालेगा, बल्कि राज्य में पानी के प्रबंधन और वितरण के नए अध्याय की ओर भी संकेत करता है। इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा, जो आने वाले समय में शहरी जीवन की धारा को एक नया मोड़ दे सकता है।
2019 में लागू हुई थी फ्री पानी योजना
कांग्रेस सरकार ने 2019 के बजट में शहरी इलाकों के लिए 15,000 लीटर तक फ्री पानी देने की योजना शुरू की थी। हालांकि, यह लाभ केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को मिल रहा है, जिनके पानी के मीटर चालू हैं। जिनके मीटर बंद हैं, वे इस सुविधा से वंचित हैं।
2018 के बाद से नहीं बढ़ी हैं पानी की दरें
राजस्थान में पानी की दरें पिछले 6 साल से नहीं बढ़ी हैं। आखिरी बार 2018 में वसुंधरा राजे सरकार के दौरान पानी की दरें बढ़ाई गई थीं। जलदाय विभाग के अनुसार, 2015 में हर साल 10% दरें बढ़ाने का प्रावधान था, जिसे 2019 में गहलोत सरकार ने हटा दिया।
दरें बढ़ाने के लिए जलदाय विभाग का नया प्रस्ताव
जलदाय विभाग ने पानी के वाटर चार्ज, स्थायी शुल्क और सीवरेज चार्ज में वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया है। विभाग का सुझाव है कि दरें बढ़ाने से पहले सभी घरेलू कनेक्शनों के मीटर चालू किए जाएं।
पानी के कनेक्शनों के 50% मीटर बंद
घरेलू पानी कनेक्शनों में से 50% के मीटर बंद हैं, जिससे जलदाय विभाग को नुकसान हो रहा है। मीटर बंद होने की वजह से यह पता नहीं चल पाता कि प्रत्येक उपभोक्ता ने कितना पानी इस्तेमाल किया है।
पुराना पैटर्न लागू करने की सिफारिश
जलदाय विभाग ने 2015 का पैटर्न फिर से लागू करने की सिफारिश की है, जिसमें हर साल 10% दरें बढ़ाने का प्रावधान था। वर्तमान प्रस्ताव पर सरकार की वर्षगांठ के बाद निर्णय होने की संभावना है।
राज्य सरकार का रुख
फ्री पानी योजना को बंद करने और पानी की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री स्तर पर विचाराधीन है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में पानी महंगा हो सकता है।
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