सिर्फ चपरासी की नौकरी, पर पहुंचे बीटेक-एमबीए भी… आखिर क्यों मजबूर हुए पढ़े-लिखे युवा?

 Rajasthan 4th class recruitment: राजस्थान के 38 जिलों में 1,286 परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश-नियंत्रण और सुरक्षा कड़ी रखी गई है। दोनों पालियाँ — सुबह 10–12 और दोपहर 3–5 ….चल रही हैं। बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज ने X पर बताया कि पहली पाली की उपस्थिति लगभग 84% रही। केंद्रों पर मेटल-डिटेक्टर, फोटो-मैच, और कड़े सत्यापन प्रक्रियाएँ लागू रहीं; परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले प्रवेश बंद कर दिए गए। देर से आए अभ्यर्थी गेट पर हाथ जोड़कर (Rajasthan 4th class recruitment) विनती करते दिखे पर नियम सख्त रहे।

महिलाओं के आभूषण और धागे कन्फिस्केट

सुरक्षा-नियमों के तहत कई महिला अभ्यर्थियों को कानों की बालियाँ, अंगूठियाँ, पायल और गले में पहने धागे उतरवाने पड़े; कुछ मामलों में धागे कैंची से काटे गए। यह कदम सुरक्षा के लिए उठाया गया बताया गया, पर कई अभ्यर्थियों ने असहजता की शिकायत भी की। बोर्ड ने अनुशासन बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि प्रश्नपत्रों की जानकारी साझा न की जाए।

 क्यों आए इतने उच्च-शिक्षित उम्मीदवार?

रिपोर्टिंग से पता चला कि आवेदकों में बड़ी संख्या ऐसे हैं जिन्होंने आरएएस प्री, रीट, पटवारी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाएँ पास या दी हैं। जयपुर के मुकेश कुमार मीणा (LLB, हाईकोर्ट प्रैक्टिस) व अजमेर की खुशबू शुभवत (MA) जैसी कई दावेदारों ने बताया कि मौजूदा आर्थिक अनिश्चय, अस्थिर रोजगार बाजार और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ उन्हें किसी भी स्थिर सरकारी नौकरी के लिये प्रवृत्त कर रही हैं — भले ही पद 10वीं योग्यता पर आधारित हो।

प्रौद्योगिकी और फर्जी प्रोफ़ाइल

बोर्ड ने बताया कि लगभग 25 लाख कैंडिडेट्स के फोटो-मैच में 1,700 प्रोफ़ाइल्स पर एक से अधिक फोटो/नाम मैच कर रहे हैं — जिन्हें ‘डमी’ प्रोफाइल के रूप में चिन्हित किया जा रहा है। सॉफ़्टवेयर-आधारित सत्यापन और केंद्र-स्तरीय चेकिंग इसी प्रकार की धांधली रोकने के उपाय हैं।

कठोर परिदृश्य के पीछे बड़े प्रश्न

यह परीक्षा सिर्फ भर्ती प्रक्रिया नहीं है — यह श्रमबाज़ार, शिक्षा-नीति और नौकरियों के असंतुलन का आईना भी है। जब उच्च-शिक्षित युवा भी 10वीं योग्यता वाली नौकरियों में उतरते हैं, तो प्रश्न उठते हैं: क्या शिक्षा-व्यवस्था और अर्थव्यवस्था साथ नहीं चल रही? क्या नीतिगत हस्तक्षेप (रोज़गार सृजन, कौशल प्रशिक्षण) की त्वरित आवश्यकता नहीं है?

कैंडिडेट्स की आवाज़ें

कुछ अभ्यर्थी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा कदमों की सराहना कर रहे हैं; वहीं कई का कहना है कि नौकरियों की कमी ने उन्हें हर वैकेंसी के लिए खड़ा कर दिया है। एक अभ्यर्थी ने कहा, “हम तैयारी कर चुके हैं — पर अवसर कम हैं; इसीलिए छोटे स्तर की नौकरी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।”

 पारदर्शिता जरूरी, पर नीति-चिंतन अनिवार्य

राजस्थान 4th-class भर्ती परीक्षा में उच्च-शिक्षित आवेदकों की बड़ी संख्या सिर्फ भर्ती का बिंदु नहीं — यह संकेत है कि रोज़गार नीति और शिक्षा-एलाइनमेंट पर गंभीर बहस की आवश्यकता है। प्रशासन द्वारा कड़ी सुरक्षा व फोटो-मैचिंग जरूरी कदम हैं, पर दीर्घकालिक समाधान के लिए रोज़गार सृजन, स्किल-मॅचिंग और वैकल्पिक करियर मार्गों पर ध्यान चाहिये।

 

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बोध सौरभ डिजिटल 

 

Bodh Saurabh Web Team

Bodh Saurabh is an experienced Indian journalist and digital media professional, with over 14 years in the news industry. He currently works as the Assistant News Editor at Bodh Saurabh Digital, a platform known for providing breaking news and videos across a range of topics, including national, regional, and sports coverage.

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