Sukhoi टायरों से खिंचेगा रथ! ISKCON ने रचा इतिहास, कोलकाता रथ यात्रा 2025 बनेगी मिसाल

ISKCON Kolkata Rath Yatra: कोलकाता परंपरा और तकनीक का ऐसा संगम शायद ही पहले कभी देखा गया हो। कोलकाता की ऐतिहासिक रथ यात्रा (Rath Yatra Kolkata 2025) इस साल इतिहास रचने जा रही है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन भव्य रथों में से भगवान जगन्नाथ का रथ अब भारत के सबसे ताकतवर फाइटर जेट Sukhoi के टायरों पर चलेगा। (ISKCON Kolkata Rath Yatra ) इस अभूतपूर्व घटना के पीछे है 20 साल की खोज, एक 16 टन भारी रथ की चुनौती, और एक संत की अटूट साधना।


2005 से शुरू हुई थी खोज, Boeing के सेकेंड-हैंड टायर थे पहले

ISKCON कोलकाता के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमण दास ने बताया कि पहले रथ में इस्तेमाल होने वाले टायर सेकेंड-हैंड Boeing 747 विमान के टायर थे, जो दशकों से काम में लिए जा रहे थे। लेकिन 2005 में उन्होंने टायरों की हालत देखी और महसूस किया कि अब समय आ गया है कुछ नया और मजबूत करने का।


रथ का वजन 16 टन तक, टायरों को ढूंढना बना मुश्किल काम

सबसे पहली चुनौती थी — रथ का वास्तविक वजन जानना। जब रथ को तौला गया, तो उसका वजन करीब 9 टन निकला। रथ पर चढ़ने वाले भक्तों और खींचने की व्यवस्था को मिलाकर कुल भार 16 टन तक पहुंच जाता है। इतने भारी रथ के लिए अत्यंत मजबूत और भरोसेमंद टायरों की जरूरत थी।


पहले Dunlop से संपर्क, फिर MRF ने निभाई भूमिका

इस कार्य के लिए सबसे पहले Dunlop से संपर्क किया गया, लेकिन पता चला कि वे अब ऐसे टायर बनाना बंद कर चुके हैं। इसके बाद 2018 में MRF से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन तब बात नहीं बनी।

आखिरकार दिसंबर 2024 में चमत्कार हुआ। MRF ने खुद ISKCON से संपर्क किया और जब उन्हें बताया गया कि टायर भगवान जगन्नाथ के रथ के लिए चाहिए, तो वे स्तब्ध रह गए।
MRF अधिकारियों ने कहा, “ऐसे टायर तो अब तक केवल इंडियन एयरफोर्स ही मांगती थी।” लेकिन फिर आस्था ने विज्ञान से हाथ मिलाया—और जनवरी 2025 में Sukhoi Fighter Jet में इस्तेमाल होने वाले चार टायर ISKCON कोलकाता को सौंप दिए गए।


₹1.80 लाख की लागत, 24 किलोमीटर का सफल ड्राई रन

चार टायरों की कुल लागत ₹1.80 लाख आई। इन्हें सावधानीपूर्वक रथ में फिट किया गया और इसके बाद एक 24 किलोमीटर लंबा ड्राई रन आयोजित किया गया। यह परीक्षण यात्रा पूरी तरह सफल रही, जिससे साबित हुआ कि रथ अब पूरी तरह तैयार है 2025 की यात्रा के लिए।


1972 से रची जा रही है परंपरा, अब इतिहास बन रहा है

कोलकाता में ISKCON की रथ यात्रा की शुरुआत 1972 में एक छोटे रथ से हुई थी। पांच साल बाद एक भक्त ने तीन विशाल रथ दान किए, जिससे यह आयोजन विशाल रूप लेने लगा। आज यह रथ यात्रा कोलकाता के सबसे भव्य और श्रद्धा से लबरेज़ धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है, जिसमें हर साल लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।


 परंपरा को पंख मिले — Sukhoi के पंख!

इस बार की रथ यात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक-तकनीकी चमत्कार बनने जा रही है। जब भगवान का रथ भारतीय वायुसेना की ताकत से चलेगा, तो यह केवल रथ नहीं खिंचेगा—यह भक्ति, विज्ञान और संकल्प की विजय यात्रा होगी।

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Bodh Saurabh

Bodh Saurabh, a journalist from Jaipur, began his career in print media, working with Dainik Bhaskar, Rajasthan Patrika, and Khaas Khabar.com. With a deep understanding of culture and politics, he focuses on stories related to religion, education, art, and entertainment, aiming to inspire positive change through impactful reporting.

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