श्राद्ध में सोना खरीदना अशुभ माना जाता, फिर भी दाम आसमान छू रहे हैं…आखिर क्यों बदल रहा ट्रेंड?

24 Carat Gold Price: परंपरागत मान्यताओं के मुताबिक श्राद्ध के दिनों में सोना खरीदना शुभ नहीं माना जाता और इसलिए मांग घटती है। इस बार स्थिति उलट देखी गई — सितंबर 2025 में श्राद्ध के बावजूद सोने की कीमतें लगातार बढ़ीं। 11 सितंबर को 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,10,000 प्रति तोला दर्ज की गई, 22 कैरेट ₹1,06,000 और 18 कैरेट के दाम ₹88,400 तक पहुंच गए।(24 Carat Gold Price) इस असामान्य उछाल के पीछे धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और नीतिगत कारणों का प्रभाव स्पष्ट दिखता है।

वैश्विक नीतियाँ और ट्रेड फैसले — क्या बढ़ा रहे हैं दाम?

सोने की कीमतें कई कारकों से संचालित होती हैं: मुद्रा विनिमय, अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियाँ, और आर्थिक अनिश्चितता। हालिया समय में कुछ नीतिगत निर्णयों ने सोने की मांग और कीमतों को पुष्ट किया है। उदाहरण के तौर पर, अमेरिकी प्रशासन द्वारा कुछ वस्तुओं पर टैरिफ छूट जैसे कदम (8 सितंबर से लागू) ने वैश्विक व्यापार में चालें बदलीं और निवेशकों की प्रतिक्रिया में सोने की मांग को समर्थन मिला।

ब्याज दरों की उम्मीद और सुरक्षित संपत्ति की चाह

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दिशा और ब्याज दरों से संबंधित उम्मीदें भी निर्णायक रहीं। जब ब्याज दरों में कमी की प्रतीक्षा रहती है, निवेशक कम-जोखिम वाले विकल्पों की ओर रुझान करते हैं — और सोना पारंपरिक रूप से ‘सेफ-हेवन’ माना जाता है। ऐसे बाजार माहौल में सोने की खरीद बढ़ती है, जिससे स्थानीय और वैश्विक बाजार दोनों में दाम ऊपर जाते हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की उपाध्यक्ष अक्षा कांबोज ने भी इसे सुरक्षित निवेश के रूप में पहचाना।

रुपया की कमजोरी और डॉलर का प्रभाव

भारत में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतें डॉलर में तय होती हैं। इस वर्ष रुपये की कमजोर पकड़ ने आयातित सोने की कीमतों को महंगा किया है। डॉलर के सापेक्ष रुपये की गिरावट का अर्थ है कि घरेलू खरीदारों को अधिक रुपये खर्च करने होंगे, जिससे घरेलू सोने के दाम ऊपर जा रहे हैं।

किस तरह के आर्थिक संकेतक बने निर्णायक?

  • वैश्विक ट्रेड तनाव और टैरिफ नीतियाँ — अनिश्चितता बढ़ाती हैं।
  • मुद्रा विनिमय (डॉलर बनाम रुपया) — रुपये की गिरावट घरेलू कीमतें बढ़ाती है।
  • ब्याज दरों की उम्मीद — कम दरों की संभावना सोने की मांग बढ़ाती है।
  • भिड़ंत और भू-राजनीतिक घटनाएँ — संकट के समय निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर जाते हैं।

खरीदारों और व्यापारियों की प्रतिक्रिया

वर्तमान माहौल में आभूषण खरीदारों का व्यवहार मिश्रित दिखता है: धार्मिक कारणों से व्यक्तिगत खरीद कुछ हद तक सीमित रहीं, लेकिन निवेशक और ज्वैलर्स अधिक सक्रिय रहे। बाज़ार विश्लेषकों का कहना है कि दामों के इस उछाल के चलते कुछ खरीदार अल्पकालिक लाभ के इरादे से खरीदारी कर रहे हैं, जबकि पारंपरिक सोने-खरीदारी का पैटर्न फिलहाल प्रभावित हुआ है।

क्या अगले महीने में दाम स्थिर होंगे?

विशेषज्ञों का मानना है कि आगे का रुख निर्भर करेगा—ब्याज दरों की वास्तविक नीतिगत घोषणा, डॉलर-रुपया का आँकड़ा और अंतरराष्ट्रीय तनाव। यदि मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चितता बरकरार रहती है तो सोने की मांग और दाम बने रह सकते हैं; वरना फीडबैक के साथ बाजार समायोजित होगा।

नोट: यह रिपोर्ट आर्थिक संकेतकों और बाजार प्रवृत्तियों पर आधारित है। व्यक्तिगत निवेश निर्णयों से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।

 संपर्क: editorbodhsaurabh@gmail.com

Bodh Saurabh Web Team

Bodh Saurabh is an experienced Indian journalist and digital media professional, with over 14 years in the news industry. He currently works as the Assistant News Editor at Bodh Saurabh Digital, a platform known for providing breaking news and videos across a range of topics, including national, regional, and sports coverage.

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