क्या आप जानते हैं भाद्रपद अमावस्या पर दीपदान और ताम्र लोटा का दान क्यों माना जाता है चमत्कारी?

 Bhadrapad Amavasya : भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि—जिसे कुशग्रहणी अमावस्या, पितृ अमावस्या और दरिद्रता निवारण अमावस्या भी कहा जाता है…इस बार भाद्रपद अमावस्या 23 अगस्त को है …पितृ तृप्ति, दान-पुण्य और नकारात्मक ऊर्जा के क्षय के लिए शुभ मानी जाती है। ( Bhadrapad Amavasya ) श्रद्धा से किया गया दान, दीपदान और मंत्र-जप—परिवार में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का साधन माना गया है।

क्या दान करें: सरल, सटीक और पारंपरिक

  • अन्न एवं तिल-कुश: चावल, गेहूं, उड़द दाल; काला तिल और कुश।
  • वस्त्र एवं शीतोपकरण: काले कपड़े/कंबल, जूते-चप्पल, दैनिक वस्त्र।
  • धातु व पूजन-सामग्री: ताम्र-पात्र/लोटा (जल से भरा लोटा विशेष शुभ), तेल व दीपक।
  • सेवा-दान: अन्न, जल और मिठाई—ब्राह्मणों एवं जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

सुझाव: दान स्थानीय गौशाला/अन्नक्षेत्र/आश्रय गृह तक पहुँचे—यह सुनिश्चित करने के लिए पहले से सूची बनाएं।

दीपदान: घर और मंदिर—दोनों स्थानों पर प्रकाश

  • घर के आंगन/द्वार पर सरसों तेल का दीपक जलाएं।
  • संभव हो तो पीपल वृक्ष के नीचे या मंदिर में भी दीपक लगाएं।

मंत्र-जप और पाठ: मन-प्राण की शुद्धि

  • ॐ नमः शिवाय — 108 बार जप।
  • हनुमान चालीसा या विष्णु सहस्रनाम का पाठ।
  • पितृ शांति हेतु: अपने पितरों के नाम लेकर “ॐ श्री पितृभ्यः नमः” का जप।

क्या न करें: व्रत के संयम

  • सेवन-वर्जना: मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन का परहेज।
  • आचार-वर्जना: झगड़ा, अपशब्द और कलह से दूर रहें।
  • शरीर-आचार: नाखून/बाल न काटें—दिन भर साधु-संयम बनाए रखें।

घर पर सरल विधि: पाँच चरणों में पूजन

  1. स्नान के बाद संकल्प लें—“पितृ तृप्ति एवं परिवार कल्याण” हेतु।
  2. स्वच्छ पाट/वेदी पर दीपक जलाकर कुश रखें।
  3. ताम्बे के लोटे में जल भरकर प्रार्थना—पितरों का स्मरण।
  4. मंत्र-जप/पाठ (ऊपर वर्णित) करके तिल-जल अर्पित करें।
  5. निकटतम जरूरतमंद/मंदिर/अन्नक्षेत्र में दान व भोजन कराएं।
 भाद्रपद अमावस्या पर दान, दीपदान, मंत्र-जप और संकल्प—ये चार स्तंभ पितृ-तृप्ति के साथ घर-परिवार में सौभाग्य और सकारात्मकता का दीप प्रज्वलित करते हैं।

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Bodh Saurabh

Bodh Saurabh, a journalist from Jaipur, began his career in print media, working with Dainik Bhaskar, Rajasthan Patrika, and Khaas Khabar.com. With a deep understanding of culture and politics, he focuses on stories related to religion, education, art, and entertainment, aiming to inspire positive change through impactful reporting.

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