क्या दान करें: सरल, सटीक और पारंपरिक
- अन्न एवं तिल-कुश: चावल, गेहूं, उड़द दाल; काला तिल और कुश।
- वस्त्र एवं शीतोपकरण: काले कपड़े/कंबल, जूते-चप्पल, दैनिक वस्त्र।
- धातु व पूजन-सामग्री: ताम्र-पात्र/लोटा (जल से भरा लोटा विशेष शुभ), तेल व दीपक।
- सेवा-दान: अन्न, जल और मिठाई—ब्राह्मणों एवं जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
सुझाव: दान स्थानीय गौशाला/अन्नक्षेत्र/आश्रय गृह तक पहुँचे—यह सुनिश्चित करने के लिए पहले से सूची बनाएं।
दीपदान: घर और मंदिर—दोनों स्थानों पर प्रकाश
- घर के आंगन/द्वार पर सरसों तेल का दीपक जलाएं।
- संभव हो तो पीपल वृक्ष के नीचे या मंदिर में भी दीपक लगाएं।
मंत्र-जप और पाठ: मन-प्राण की शुद्धि
- ॐ नमः शिवाय — 108 बार जप।
- हनुमान चालीसा या विष्णु सहस्रनाम का पाठ।
- पितृ शांति हेतु: अपने पितरों के नाम लेकर “ॐ श्री पितृभ्यः नमः” का जप।
क्या न करें: व्रत के संयम
- सेवन-वर्जना: मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन का परहेज।
- आचार-वर्जना: झगड़ा, अपशब्द और कलह से दूर रहें।
- शरीर-आचार: नाखून/बाल न काटें—दिन भर साधु-संयम बनाए रखें।
घर पर सरल विधि: पाँच चरणों में पूजन
- स्नान के बाद संकल्प लें—“पितृ तृप्ति एवं परिवार कल्याण” हेतु।
- स्वच्छ पाट/वेदी पर दीपक जलाकर कुश रखें।
- ताम्बे के लोटे में जल भरकर प्रार्थना—पितरों का स्मरण।
- मंत्र-जप/पाठ (ऊपर वर्णित) करके तिल-जल अर्पित करें।
- निकटतम जरूरतमंद/मंदिर/अन्नक्षेत्र में दान व भोजन कराएं।


















































