भक्ति, संगीत और श्रद्धा का संगम
कथा के दौरान भक्ति संगीत और भजनों की मधुर स्वर-लहरियों ने वातावरण को भावविभोर कर दिया। भक्तजन संतों के चरित्र श्रवण में लीन होकर भक्ति की गहराइयों में डूबते चले गए। प्रारम्भ में अलबेली माधुरी शरण जी महाराज, कथा आयोजक रामगोपाल सर्राफ एवं अन्य भक्तजनों ने व्यासपीठ की आरती उतारी।

कथा का महत्व और समय
इन्द्रेश महाराज ने कहा कि भक्तों की जीवनगाथा सुनने से श्रद्धा, प्रेम, निष्ठा और आस्था का भाव दृढ़ होता है। जीवन में कठिनाइयाँ आने पर संतों के आदर्श चरित्र से शक्ति और धैर्य का संचार होता है। प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि यह भक्तमाल कथा 25 अगस्त तक अपराह्न 4 बजे से सायं 7:30 बजे तक चलेगी।


















































