कलाकार से लेकर जनप्रतिनिधि तक
धर्मेंद्र की मौत का समाचार केवल एक फिल्म सितारे के चले जाने तक सीमित नहीं है। वे एक ऐसी ज़मीन से निकले नेता भी थे जिन्होंने लोक सांसद के रूप में एक अलग पहचान बनाई। 2004 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर राजस्थान के बीकानेर से लोकसभा जीता, 2009 तक सांसद रहे और वहां के लोगों के साथ गहरा जुड़ाव बनाये रखा। उनके निधन के साथ अब उस दौर का भी अंत हुआ जिसमें अभिनेता सार्वजनिक जीवन और राजनीति के बीच सहज रूप से पारे गए काम करते थे।
जन्म और प्रारम्भिक जीवन
धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के नसराली गाँव में हुआ था। छोटे शहर के सादे परिवेश से आए इस कलाकार ने अपनी मेहनत और करिश्माई छवि से छह दशक से अधिक समय तक दर्शकों के दिलों पर राज किया।
सिनेमा में सफर
अपने करियर की शुरुआत उन्होंने 1960 के दशक की फिल्म दिल भी तेरा, हम भी तेरे से की। इसके बाद धर्मेंद्र ने लगातार हिट फिल्में दीं और 1970-80 के दशक में वे एक्शन फिल्मों के सबसे लोकप्रिय चेहरे बन गए। शोले (1975) में वीरू का किरदार आज भी दर्शकों की जुबान पर है। इसी तरह चुपके चुपके, अनुपमा, सत्यकाम, धरमवीर और कई अन्य फिल्मों ने उन्हें हर उम्र के दर्शक का प्रिय बना दिया।
पारिवारिक जीवन और फिल्मी वंश
धर्मेंद्र ने 1954 में प्रकाश कौर से अपनी पहली शादी की; उनके दो पुत्र — सनी देओल और बॉबी देओल — और दो पुत्रियाँ — विजेता व अजीता — इसी विवाह से हैं। बाद में धर्मेंद्र की शादी हेमा मालिनी से हुई, जिनसे उनकी दो पुत्रियाँ — ईशा और अहाना — हैं। उनका परिवार भारतीय फिल्म उद्योग में एक लंबे समय से सक्रिय और प्रभावशाली वंश रहा।
राजनीतिक सफर और लोकसंबंध
2004 में धर्मेंद्र ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर राजस्थान के बीकानेर से लोकसभा चुनाव जीतकर 15वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में संसद पहुँचे। पांच साल तक सांसद रहने के दौरान उन्होंने स्थानीय विकास और जनता से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई और बीकानेर व आसपास के इलाकों से घनिष्ठ नाता बनाए रखा।
क्यों याद रखा जाएगा धर्मेंद्र?
धर्मेंद्र की पहचान सिर्फ एक्शन ही-मैन से परे रही — उनकी सादगी, मेहनती पृष्ठभूमि और जनता से जुड़ाव ने उन्हें समकालीन भारतीय सिनेमा और सामाजिक जीवन का एक चिरस्थायी प्रतीक बना दिया। उनके जाने से तीन आयाम पर असर महसूस होगा:
- सांस्कृतिक-सिनेमा: शोज, ही-मैन छवि और बहुमुखी अभिनय की विरासत;
- राजनीति-जनप्रतिनिधित्व: फिल्म से संसद तक का सफर और जनता के साथ वास्तविक संपर्क;
- पारिवारिक व वंशागत योगदान: देओल परिवार द्वारा भारतीय फिल्म को मिलने वाला दीर्घकालिक योगदान।
अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि
धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार सोमवार, 24 नवम्बर 2025 को मुंबई के पवन हंस क्रीमेशन ग्राउंड में किया गया। शोक संतप्त परिवार और फिल्म जगत के कई सदस्यों ने अंतिम दर्शन दिए। श्रद्धांजलि कार्यक्रमों और सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं के साथ देशभर में उनके जीवन और कृतित्व पर चर्चा चल रही है।
एक युग का समापन
धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता या एक पूर्व सांसद नहीं थे—वे भारत की लोकप्रिय संस्कृति और सार्वजनिक जीवन के उन चेहरों में से एक थे जिन्होंने दशकों तक जनता के सहारे अपना स्थान बनाये रखा। उनकी स्मृति न केवल फिल्मों में रहेगी बल्कि उन लोगों में भी जिनसे उन्होंने जुड़कर छोटे-बड़े समुदायों में वास्तविक प्रभाव छोड़ा।
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