क्या थरूर की मुलाकात से कांग्रेस का अंदरूनी सस्पेंस खत्म होगा या नए विवाद की शुरुआत होगी?

Congress Internal Politics: नई दिल्ली। कांग्रेस के भीतर चल रही ‘सब कुछ ठीक है या नहीं’ वाली चर्चाओं के बीच शशि थरूर ने गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर सियासी हलचल को और तेज कर दिया। संसद भवन स्थित खरगे के दफ्तर में हुई यह बैठक औपचारिक भले दिखे, लेकिन इसके मायने कहीं गहरे हैं।

यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब थरूर के पार्टी हाईकमान से मतभेद की चर्चाएं लगातार सुर्खियों में थीं और उन्होंने केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जुड़ी (Congress Internal Politics)AICC की अहम बैठक में हिस्सा नहीं लिया था।

“हम एक ही पेज पर हैं”

बैठक के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर खरगे और राहुल के साथ तस्वीर साझा की और लिखा—

“आज कई विषयों पर गर्मजोशी भरी और सार्थक चर्चा के लिए धन्यवाद। भारत के लोगों की सेवा में आगे बढ़ते हुए हम सब एक ही पेज पर हैं।”

थरूर ने अपने अंदाज़ में यह भी जोड़ा…“मैं और क्या कहूं? मैंने हमेशा पार्टी के लिए कैंपेन किया है, मैंने कहां कैंपेन नहीं किया है?”

CM की कुर्सी? थरूर ने साफ किया रुख

केरल के मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर थरूर ने दो टूक कहा कि इस विषय पर बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा—

“मुझे किसी भी चीज के लिए कैंडिडेट बनने में दिलचस्पी नहीं है। मैं सांसद हूं और तिरुवनंतपुरम के मेरे वोटर्स को मुझ पर भरोसा है।” थरूर का यह बयान साफ करता है कि वे फिलहाल खुद को संसद और राष्ट्रीय राजनीति में ही केंद्रित रखना चाहते हैं।

‘कुछ मसले हैं’—थरूर का पुराना संकेत

दरअसल, विवाद की जड़ 24 जनवरी का वह बयान है, जब केरल लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी नई किताब ‘श्री नारायण गुरु’ पर बोलते हुए थरूर ने स्वीकार किया था कि उनके और पार्टी के बीच कुछ “मसले” हैं। “जो भी मसले हैं, मुझे पार्टी नेतृत्व से उन पर चर्चा करनी होगी। सार्वजनिक मंच पर इस पर कुछ नहीं कहूंगा।” उन्होंने यह भी कहा था कि बैठक में न जाने को लेकर मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स सही हो सकती हैं, कुछ नहीं, लेकिन इन बातों को सार्वजनिक बहस नहीं बनाना चाहिए।

कोच्चि की ‘महापंचायत’ और उपेक्षा का भाव

थरूर की नाराजगी की चर्चाओं को उस वक्त और हवा मिली, जब 19 जनवरी को कोच्चि में कांग्रेस की ‘महापंचायत’ के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद कई नेताओं का अभिवादन किया, लेकिन थरूर का नाम नहीं लिया।

बताया जाता है कि इस घटना से थरूर को गहरा अपमान महसूस हुआ, क्योंकि वे मंच पर मौजूद थे, फिर भी उन्हें नजरअंदाज किया गया। यही वह क्षण था, जिसने ‘मतभेद’ की कहानी को जन्म दिया।

सवाल अब भी बाकी

खरगे और राहुल से मुलाकात के बाद भले ही थरूर ने “सब ठीक” का संदेश दिया हो, लेकिन कांग्रेस के भीतर यह सवाल अब भी कायम है—

क्या यह मुलाकात नाराजगी मिटाने की कोशिश थी, या फिर सिर्फ गलतफहमियों पर पर्दा डालने का प्रयास?

फिलहाल कांग्रेस ने सार्वजनिक तौर पर एकता का प्रदर्शन किया है, लेकिन असली तस्वीर आने वाले महीनों में केरल की राजनीति और पार्टी की रणनीति से साफ होगी।

Bodh Saurabh Web Team

Bodh Saurabh is an experienced Indian journalist and digital media professional, with over 14 years in the news industry. He currently works as the Assistant News Editor at Bodh Saurabh Digital, a platform known for providing breaking news and videos across a range of topics, including national, regional, and sports coverage.

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