Rajasthan High Court corruption: जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग, जो करीब 220 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई थी, अब एक नए विवाद में फंस चुकी है। (Rajasthan High Court corruption)पिछले दो सालों में इस भव्य भवन के जर्जर होने और टूटने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब, इस पर बड़ा एक्शन लिया गया है।
हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग को बनाने वाली कंपनी पर केस दर्ज कर लिया गया है, और इस शिकायत को लेकर अब पुलिस जांच में जुटी है। पाल रोड स्थित रजत एंक्लेव के निवासी शरद जोशी ने लापरवाही के आरोप में कंपनी के अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। यह भवन 2008 में आरएसआरडीसी लिमिटेड द्वारा बनाना शुरू किया गया था और दिसंबर 2019 में हाईकोर्ट को सौंपा गया था। लेकिन अब इसकी सुरक्षा और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जोधपुर हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग में लगातार हादसे
हादसों का सिलसिला
जोधपुर हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग में अब तक कई खतरनाक हादसे हो चुके हैं। 20 फरवरी 2023 को चेम्बर नं. 14 की छत गिरने से फॉल्स सिलिंग और अन्य फर्नीचर क्षतिग्रस्त हो गए। इसी तरह की घटनाएं कोर्ट संख्या 02, 09, 16 और परिसर में विभिन्न स्थानों पर पहले भी घटित हो चुकीं हैं।
नवीनतम घटनाएं:
29 अप्रैल 2023 को डोम एरिया की छत का कुछ हिस्सा गिरने से नई परेशानियाँ सामने आईं। 23 और 28 जून 2023 को सिविल विविध अपील अनुभाग और बिल अनुभाग की छतें भी गिर गईं। 12 सितंबर 2024 को बारिश के कारण कोर्ट कक्ष सं. 02 की छत से पानी टपकने के साथ प्लास्टर उखड़कर गिर गया। इसके अलावा कोर्ट संख्या 16 में छत व खिड़की से पानी रिसने के कारण काम रोकना पड़ा।
भवन में Structural समस्याएं
सभी घटनाओं के बाद, पुलिस रिपोर्ट में यह सामने आया कि भवन के विभिन्न हिस्सों में प्लास्टर उखड़ा हुआ है और सरिये फूल रहे हैं। कई पिलरों में दरारें आ चुकी हैं और ग्रेनाइट टाइल्स बेतरतीब तरीके से लगी हुई हैं।
फायर सेफ्टी और निर्माण में लापरवाही
18 सितंबर 2024 को एक भीषण आग की घटना के बाद पता चला कि भवन में फायर सेफ्टी सिस्टम वर्किंग कंडीशन में नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया और दोषपूर्ण सामग्री का इस्तेमाल हुआ।
कंपनी और अधिकारियों पर आरोप
आरएसआरडीसी लिमिटेड के अधिकारियों, ठेकेदारों और कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने भवन निर्माण में अनियमितता बरतते हुए राजकोष को भारी नुकसान पहुँचाया और मानव जीवन को संकट में डाला।
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