Kartik Purnima 2025: नई दिल्ली / वाराणसी / हरिद्वार। कार्तिक मास की समाप्ति पर आने वाली कार्तिक पूर्णिमा (जिसे देव-दीपावली और त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है) 2025 के रूप में 4 नवम्बर 2025 रात 10:36 से 5 नवम्बर 2025 शाम 6:48 बजे तक रहेगी। इस पावन अवसर पर गंगा स्नान, दीपदान और सत्यनारायण कथा का विशेष महत्व है — पर इस बार आयोजन का नया एंगल है स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यावरणीय असर और तीर्थयात्रा-प्रबंधन।
परंपरागत रूप में कार्तिक पूर्णिमा आध्यात्मिक शुद्धि और समृद्धि का प्रतीक है, पर हर साल बढ़ते श्रद्धालुओं के कारण गंगा तटों पर पर्यटन-आधारित कारोबार को भी बड़ा लाभ होता है — होटल, ठेले, नाव-सेवाएँ और स्थानीय हस्तशिल्प बाजार पर खास असर पड़ता है। वहीं एक साथ हजारों जल-दीयों और मिट्ठाई-प्लास्टिक का उपयोग नदी-तटों की स्वच्छता और जैव-विविधता पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसलिए इस बार प्रशासन न केवल उत्सव की व्यवस्था कर रहा है, बल्कि इको-फ्रेण्डली दीप, कचरा प्रबंधन और तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षा-प्रोटोकॉल पर भी फोकस कर रहा है।
कार्तिक पूर्णिमा 2025 — प्रमुख मुहूर्त और पूजा-सूचना
- तिथि आरंभ: 04 नवंबर 2025, रात 10:36
- तिथि समापन: 05 नवंबर 2025, शाम 6:48
- गंगा स्नान मुहूर्त: सुबह 04:52 — 05:44
- पूजा मुहूर्त: सुबह 07:58 — 09:20
इन मुहूर्तों में स्नान, दीपदान और सत्यनारायण कथा का आयोजन करने को अत्यंत शुभ माना जाता है।
आस्था की विधि
- स्वच्छ स्नान: गंगा या किसी पवित्र जलाशय में स्नान कर शुद्धिकरण करें।
- दीपदान: गंगा किनारे मिट्टी के दीये, घी/तेल, पुष्प और धूप लेकर दीपदान करें।
- सत्यनारायण कथा: घर/मंदिर में कथा का आयोजन व व्रत रखना फलदायी माना जाता है।
- दान: भोजन, वस्त्र या धार्मिक सामग्री का दान कर पुण्य बढ़ाएँ।
स्थानीय प्रशासन की तैयारी — सुरक्षा, यातायात और सफाई
मुख्य तीर्थ-नगरों में प्रशासन ने ये उपाय सुझाए/लागू किए हैं:
- नौकायन और घाटों पर भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त स्टाफ व तम्बू-पोश्त।
- इको-फ्रेंडली मिट्टी के दीयों के उपयोग और प्लास्टिक-कमी के लिए अभियान।
- आपातकालीन चिकित्सा बूथ और वाटर-सुरक्षा टीम।
- रात में लाइटिंग/साउंड प्रबंधन ताकि पारंपरिक माहौल बरकरार रहे पर प्रदूषण नियंत्रित रहे।
पर्यावरणीय सुझाव — पूजा के साथ जिम्मेदारी
प्रकृति और आस्था की रक्षा के लिए ये छोटे कदम उत्सव को टिकाऊ बनाएंगे:
- मिट्टी के दीये व प्राकृतिक तेल का प्रयोग; प्लास्टिक दीपक और फोम कांच के उपयोग से बचें।
- दीपदान के बाद अवशेषों को नदी में नहीं, नियत स्थान पर अलग कर दें।
- घी की मात्रा नियंत्रित रखें और कचरा प्रबंधन के निर्देश माने।
- स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रदान किए गए समर्पित कूड़ा हटाने वाले बिंदुओं का प्रयोग करें।
स्थानीय व्यापारियों के लिए अवसर
डेविड-स्टेट विश्लेषण की दृष्टि से इस उत्सव के दौरान स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा मिलता है — आवास, खाद्य-सुविधा, धार्मिक सामग्री और नाव-टूरिज्म को बढ़ावा मिल सकता है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे छोटे विक्रेताओं के लिए लघु-लाइसेंस और स्वास्थ्य-सुरक्षा निर्देश जारी करें ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था का लाभ समान रूप से बंटे।
आस्था और जिम्मेदारी का मेल
कार्तिक पूर्णिमा और देव-दीपावली 2025 एक बार फिर आस्था का महापर्व है — पर यह पर्व तभी टिकाऊ और प्रसन्नता देने वाला रहेगा जब श्रद्धालु, पूजा आयोजक और प्रशासन मिलकर पर्यावरण और सुरक्षा का ध्यान रखें। गंगा स्नान, दीपदान और सत्यनारायण कथा से मिले आध्यात्मिक लाभ तब दोगुना होगा जब हम प्रकृति व समुदाय के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएँगे।
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