Jaipur News Hindi: अर्जुन नगर अंडरपास आज जयपुर की व्यवस्था पर करारा तमाचा है। जिस अंडरपास को जनता की सुविधा और सुरक्षित आवागमन के लिए बनाया गया था, वही आज प्रशासन और रेलवे की घोर लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। अंडरपास के प्रवेश द्वार से लेकर दोनों ओर निकास तक कचरे के ढेर जमे हुए हैं। (Jaipur News Hindi) प्लास्टिक, टूटी बोतलें, सड़ा-गला कचरा और बदबू पूरे इलाके को जहरीला बना रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।
सीढ़ियों पर चलना नहीं, बचना पड़ता है
स्थिति इतनी भयावह है कि आम लोगों के लिए बनी सीढ़ियों को लोगों ने शौचालय में बदल दिया है। दीवारों पर गंदगी, सीढ़ियों पर मल-मूत्र और हर कदम पर संक्रमण का खतरा—यह नजारा किसी पिछड़े गांव का नहीं, बल्कि जयपुर जैसे शहर का है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे मजबूरी में नाक बंद कर यहां से गुजरते हैं। यह हालात प्रशासन के लिए शर्म से सिर झुकाने के लिए काफी हैं।
कब लगी थी आखिरी झाड़ू? किसी को याद नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि अंडरपास बनने के बाद से आज तक यहां नियमित सफाई नहीं हुई। ऐसा लगता है जैसे उद्घाटन के बाद इसे हमेशा के लिए भूल ही गए हों। क्या यही “स्वच्छ भारत” और “स्मार्ट सिटी” का सच है? रोजाना सैकड़ों लोग इसी गंदगी से होकर निकलने को मजबूर हैं, लेकिन किसी अधिकारी ने हालात देखने की जरूरत तक नहीं समझी।
दो जोन…सफाई…जनता क्या करे?
जब नगर निगम के अधिकारियों से से सवाल किया गया तो बेशर्म जवाब मिला कि अंडरपास दो जोन में आता है…इसलिए सफाई कौन करवाएगा।। यह बयान खुद सिस्टम की मानसिकता को उजागर करता है। क्या सफाई सिर्फ अफसरों को दिखाने के लिए होती है? क्या तब तक आम जनता कचरे और गंदगी के बीच से ही निकलती रहेगी? यह जवाब नहीं, जनता के साथ मजाक है।

मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ की चुप्पी पर सवाल
यह अंडरपास मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां से विधायक हैं कालीचरण सराफ। सवाल उठता है कि क्या विधायक को इस बदहाल स्थिति की जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं? जनता पूछ रही है कि आखिर उनके चुने हुए प्रतिनिधि कब जागेंगे और कब प्रशासन व रेलवे को जवाबदेह बनाएंगे।
जनता का आक्रोश, कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। उनका कहना है कि यह केवल गंदगी का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान का सवाल है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। अब सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है।


















































