राम मंदिर — नया शेड्यूल (विंटर / सर्दियों के लिए)
| क्रम | क्रिया | समय |
|---|---|---|
| 1 | मंगला आरती | 04:30 बजे |
| 2 | श्रृंगार आरती व दर्शन के लिए प्रवेश | 06:30 बजे |
| 3 | दर्शन आरंभ | 07:00 बजे |
| 4 | भोग आरती — प्रवेश बंद | 12:00 बजे |
| 5 | मंदिर अस्थायी बंद | दोपहर 01:00 बजे तक |
| 6 | दोपहर बाद पुनः दर्शन प्रारंभ | 01:00 बजे |
| 7 | प्रवेश बंद | रात 09:00 बजे |
| 8 | दर्शन समाप्त | रात 09:15 बजे |
| 9 | शयन आरती और कपाट बंद | रात 09:30 बजे |
पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा
प्रशासन के अनुसार यह बदलाव ठंड में भक्तों की सुविधा और घाट-प्रवेश तथा सेवाओं का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित करेगा। जनवरी से जून 2025 के आंकड़े बताते हैं कि इस अवधि में कुल 23,82,14,737 श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे — जिनमें से 23,81,64,744 भारतीय और 49,993 विदेशी थे। इतनी बड़ी भीड़ ने स्थानीय होटलों, ढाबों, गाइड सर्विसेस और परिवहन सहित कई सेवाक्षेत्रों को जीवंत कर दिया है।
प्रशासनिक तैयारी और भीड़-प्रबंधन
- नए समय से सुरक्षा और मेडिकल सुविधाओं का शिफ्ट व रोस्टर बेहतर तरीक़े से व्यवस्थित किया जा सकेगा।
- दोपहर में मंदिर बंद रहने का एक घंटा (12:00–13:00) व्यवस्थागत ब्रेक देता है — जिससे सफाई, भोग-व्यवस्था और आरती-तैयारी सुचारु होंगी।
- ठंड के कारण सुबह-शाम के पीक-घंटों में व्यवस्थागत कंट्रोल, हीटर/शेल्टर और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का प्रावधान ज़्यादा आवश्यक है।
आर्थिक असर — तीर्थाटन से स्थानीय विकास
इतनी भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन ने अयोध्या में रोज़गार के नए अवसर पैदा किए हैं — अस्थायी व स्थायी दोनों तरह के रोजगार, रिटेल सेवाएँ, गाइडिंग, परिवहन और छोटे उद्योगों की आमदनी बढ़ी है। साथ ही ‘दीपोत्सव’ जैसी पहलें (जो 2017 से चली आ रही हैं) शहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए आकर्षक बनाती रही हैं।
चुनौतियाँ और सुझाव
- भीड़-नियंत्रण में टेक्नोलॉजी का उपयोग — टिकटिंग, टाइम- स्लॉट बुकिंग और रीयल-टाइम भीड़-मानिटरिंग।
- पर्यावरण प्रबंधन — कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक-मुक्त क्षेत्र और सतत् ऊर्जा उपयोग।
- स्थानीय छोटे कारोबारियों का सशक्त समर्थन — स्थानीय उत्पादों की पैकेजिंग और शॉपिंग जोन का विकास।


















































