मुख्य मंदिरों में घट स्थापना और प्रारंभिक कार्यक्रम
आमेर, दुर्गापुरा, पुरानी बस्ती, घाटगेट और झालाना डूंगरी के प्रमुख देवी मंदिरों में शुभ मुहूर्त में घट स्थापना होगी। खासकर आमेर रोड स्थित ठिकाना (श्री गोविंद देव जी के मातहत) में स्थित देवी मनसा माता मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखी जा रही है — इस वर्ष देवी मां हाथी पर विराजमान होकर मंदिर में पधारेंगी।
22 सितम्बर — घट स्थापना की विस्तृत रूपरेखा
समय: सुबह 8:30 — दोपहर 12:00 बजे तक
घट स्थापना के साथ श्री शारदीय दुर्गा देवी कल्पारंभ, विहित पूजा, व्रत, चण्डी पाठ, श्रृंगार, भोग, आरती एवं पुष्पांजलि आयोजित की जाएगी। द्वितीया से पंचमी तक प्रतिदिन चण्डी पाठ, श्रृंगार, भोग, आरती और पुष्पांजलि नियमित रूप से संपन्न होंगे। श्रद्धालुओं के लिए सुबह और संध्या दोनों कार्यक्रमों का प्रावधान रहेगा।
विशेष दिनचर्या और महाअष्टमी
- 28 सितंबर (षष्ठी): सुबह 8:30 — षष्ठी कल्पारंभ; शाम 7:30—8:30 बजे अधिवास।
- 29 सितंबर (सप्तमी): सुबह 7:00 — चण्डी पाठ, श्रृंगार, भोग व आरती।
- 30 सितंबर (अष्टमी): महाअष्टमी पूजन; संधि पूजन दोपहर 1:21 बजे; 108 नीलकमल अर्पण व बलिदान 1:45 बजे; पूजन 2:09 बजे पूर्ण होगा।
- 1 अक्टूबर (नवमी): महाविशेष पूजन, कन्या पूजन, बटुक पूजन व हनुमान पूजन; पूर्णाहुति व पुष्पांजलि।
- 2 अक्टूबर (दशमी): अपराजिता पूजन, घट विसर्जन व मां दुर्गा का डोला (झूला) पर गमन — नवरात्र महोत्सव का समापन।
ज्योतिषाचार्य की सलाह
ज्योतिषाचार्य डॉ. महेंद्र मिश्रा के अनुसार घट स्थापना के उत्तम समय में प्रातः का समय सर्वोत्तम है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा (सोमवार) को सूर्योदय 06:19 बजे होगा। कन्या लग्न व अमृत चौघड़िया (06:19–07:49) तथा अभिजित मुहूर्त (11:56–12:44) और सुबह 09:19–10:49 के शुभ चौघड़िये में घट स्थापना उपयुक्त मानी गई है।
गीता गायत्री मंदिर का विशेष आयोजन
गलता गेट स्थित श्री गीता गायत्री जी मंदिर में पंडित राजकुमार चतुर्वेदी के सानिध्य में प्रातः 07:11 बजे घंटे-घड़ियाल बजाकर महाआरती एवं घट स्थापना की जाएगी। पंचामृत व तीर्थ जल से अभिषेक एवं नई लाल पोशाक में देवी का श्रृंगार भी किया जाएगा।
मंदिर प्रबंधन से संदेश
गोविंद देवजी मंदिर के सेवाधिकारी मानस गोस्वामी ने बताया कि पूरे नवरात्र में श्रद्धालुओं के लिए दैनिक पूजा, आरती और भोग नियमित रूप से संपन्न होंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से समय का पालन और व्यवस्था में सहयोग का भी अनुरोध किया है ताकि भीड़-प्रबंधन सुचारू रहे और आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। नवरात्र का यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करता है — श्रद्धालु आते हैं, लोकल बाजार व फूडस्टॉल सक्रिय होते हैं, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से समुदाय में एक नई ऊर्जा आती है। प्रशासनिक और मंदिर स्तर पर सुरक्षा व स्वच्छता के इंतज़ाम इस बात की गारंटी हैं कि श्रद्धालु न केवल भक्ति का अनुभव करें बल्कि सुरक्षित वातावरण का भी लाभ पाएं।


















































