कौन जा सकेगा: “सेवा-दल ऑनली” व्यवस्था
- यात्रा में केवल चेले, बजंतरे और सहायक स्टाफ शामिल हो सकेंगे।
- महिलाएँ, पुरुष आम श्रद्धालु, बच्चे और बुजुर्ग—इस बार शामिल नहीं हो पाएंगे।
- निर्णय का आधार: किश्तवाड़ और कठुआ में हालिया बादल फटने की घटनाएँ और मौसम विभाग की अलर्ट एडवाइजरी।
सख्त पंजीकरण और पहचान-पुष्टि
- प्रत्येक स्वीकृत यात्री को आधिकारिक पहचान कार्ड जारी होगा।
- हर पड़ाव पर ID वेरिफिकेशन अनिवार्य—बिना कार्ड किसी को आगे नहीं जाने दिया जाएगा।
मार्ग और पंजीकरण केंद्र
- सुंगली और नालठी से जाने वालों का पंजीकरण: हाइन।
- भाला से जाने वालों का पंजीकरण: दराफड़ा मंदिर।
- छत्रगला मार्ग पूर्णतः बंद—कठुआ/ऊधमपुर से पारंपरिक ट्रेक होने के बावजूद अत्यधिक कठिनाई, लंबी पैदल दूरी और आपात सुविधाओं के अभाव के कारण अनुमति नहीं।
- निर्णय डोडा, कठुआ और ऊधमपुर प्रशासन की संयुक्त रणनीति के तहत, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचाव हो सके।
यात्रा-समय सारिणी (निर्धारित कार्यक्रम)
- 20 अगस्त: भद्रवाह और भाला से यात्रा प्रस्थान।
- 21 अगस्त: कैलाश कुंड पहुँचने का दिन।
- 22 अगस्त सुबह: वापसी।
क्यों बदलना पड़ा स्वरूप?
अत्यधिक वर्षा, भूस्खलन की संभावना, एवं बादल फटने जैसे मौसमीय खतरों ने इस साल के लिए “सुरक्षा-प्रधान, सीमित-भागीदारी” मॉडल को अनिवार्य बनाया। भीड़ और मार्ग जोखिम घटाते हुए सेफ्टी प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन प्रशासन का लक्ष्य है।


















































