US tariff: नई दिल्ली/वॉशिंगटन। अमेरिका ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार की आंतरिक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है(US tariff) कि इससे भारत के 64 अरब डॉलर के निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
क्या रूस से भारत की नजदीकी अमेरिका को चुभ रही है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले के पीछे भारत द्वारा रूस से तेल खरीद को कारण बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब एशियाई देशों में सबसे अधिक टैरिफ भारत पर लगा रहा है, जो संकेत है कि यह फैसला सिर्फ व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक दबाव का हिस्सा भी हो सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर संभावित गहरा असर
भारत की लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में निर्यात का हिस्सा सीमित होने के बावजूद यह निर्णय GDP पर 40 बेसिस प्वाइंट्स तक असर डाल सकता है। RBI ने अभी भी GDP ग्रोथ का अनुमान 6.5% रखा है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह झटका नई आर्थिक चुनौती बनकर उभर सकता है।
प्रमुख सेक्टर्स में संकट की आशंका
2024 में भारत ने अमेरिका को 81 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुएं निर्यात कीं, जिसमें टेक्सटाइल, दवाइयां और उच्च-मूल्य उत्पाद शामिल हैं। इन सेक्टर्स को अब कम टैरिफ वाले देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, जिससे लाभ मार्जिन घटने</strong का खतरा है।
सूत्रों का कहना है कि यदि ट्रंप का प्रस्तावित 10% अतिरिक्त जुर्माना भी लागू होता, तो कुल टैरिफ 35% से बढ़कर 50% हो जाता। इससे भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और कमजोर हो सकती है।
भारत को अपनानी होगी नई रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका अपनी टैरिफ नीति पर अडिग रहा, तो भारत को निर्यात के लिए नए बाजार खोजने होंगे। साथ ही उत्पादन लागत कम करने और विविध रणनीति अपनाने की आवश्यकता होगी। यह टैरिफ विवाद भारत-अमेरिका संबंधों की अग्निपरीक्षा बन सकता है। अब देखना होगा कि भारत इसे आर्थिक आघात के रूप में झेलेगा या कूटनीतिक चालाकी से समाधान निकालेगा।
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