India Pakistan ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि भारत-पाक के बीच बने हालिया सीजफायर में अमेरिका की टैरिफ चेतावनी ने अहम भूमिका निभाई। लेकिन भारत सरकार ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि यह सिर्फ और सिर्फ भारत-पाक की आपसी बातचीत का नतीजा था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा…“हम हमेशा से कहते आए हैं कि हालिया संघर्ष के थमने की वजह भारत और पाकिस्तान की आपसी बातचीत थी, कोई और वजह नहीं थी। (India Pakistan ceasefire)इस बातचीत का हिस्सा टैरिफ बिलकुल नहीं था।” इस बयान ने ट्रंप प्रशासन के उस दावे की पोल खोल दी है, जिसने संघीय अदालत में टैरिफ के आधार पर अमेरिका की अहम भूमिका बताई थी।
स्टूडेंट वीजा विवाद पर MEA की सच्चाई
भारत ने अमेरिका के स्टूडेंट वीजा पर हालिया कदमों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। साल 2023-24 में 3 लाख 30 हजार से अधिक भारतीय छात्र अमेरिका पढ़ने गए थे। MEA ने कहा,
“वीजा देना किसी भी देश का संप्रभु अधिकार है, लेकिन भारतीय छात्रों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हम उम्मीद करते हैं कि वीजा आवेदनों को योग्यता और मेरिट के आधार पर निपटाया जाएगा।”
यह साफ संदेश है कि भारत अपने छात्रों की सुरक्षा के प्रति सजग है और उनकी उचित प्रक्रिया की मांग करता है।
आतंक और बातचीत साथ नहीं चल सकते
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर भी अपना स्पष्ट रुख दोहराया है। रणधीर जायसवाल ने कहा,
“हमारा रुख स्पष्ट है कि कोई भी रिश्ता द्विपक्षीय होना चाहिए। आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। पाकिस्तान को भारत को वे आतंकवादी सौंपने होंगे, जिनकी सूची हम पहले ही दे चुके हैं। जब तक पीओके खाली नहीं होगा और क्षेत्र भारत को सौंपा नहीं जाएगा, तब तक कोई वार्ता संभव नहीं।”
सिंधु जल संधि पर भी कड़ा रुख, आतंकवाद के बिना ही होगी वार्ता
MEA ने कहा कि सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन छोड़ नहीं देता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों को दोहराते हुए कहा गया,
“आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार साथ नहीं चल सकते, और पानी और खून साथ नहीं बह सकते।”
भारत ने न केवल ट्रंप के दावों को चुनौती दी है, बल्कि पाकिस्तान के प्रति भी सख्त रुख कायम रखा है। यह संदेश विश्व समुदाय के लिए स्पष्ट है कि बातचीत तभी होगी जब आतंकवाद पर रोक लगेगी और पीओके की स्थिति स्पष्ट होगी। साथ ही, भारतीय छात्रों के हितों की भी पूरी रक्षा की जाएगी।
यह पूरी स्थिति दर्शाती है कि भारत अपनी विदेश नीति में दृढ़ता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रहा है, चाहे वह सीजफायर हो, छात्र वीजा का मुद्दा हो या पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंध।
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