New toll policy India: देशभर में टोल टैक्स को लेकर आम जनता की जेब पर पड़ते बोझ और लंबे ट्रैफिक जाम की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही थीं। राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस वे पर सफर करना जहां सुविधाजनक है, वहीं टोल शुल्क की भारी रकम अक्सर यात्रियों की मुस्कान छीन लेती है। ऐसे में अब केंद्र सरकार एक ऐसी नई टोल नीति लाने जा रही है, जो न केवल जेब पर हल्की पड़ेगी, बल्कि यात्रा को भी पहले से कहीं अधिक सहज और सरल बनाएगी।
टोल टैक्स से मिलेगी बड़ी राहत! अगर आप भी हर बार टोल गेट पर रुकते हुए जेब ढीली करने से परेशान हैं, तो अब खुश हो जाइए। केंद्र सरकार की प्रस्तावित नई टोल नीति आपके लिए लेकर आ रही है औसतन 50 प्रतिशत तक की राहत, साथ ही केवल ₹3000 में सालभर का टोल पास, जो पूरे देश के (New toll policy India )राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्यों के एक्सप्रेस वे पर मान्य होगा। सबसे बड़ी बात – अलग से कोई पास नहीं लेना होगा, बस आपका FASTag अकाउंट एक्टिव होना चाहिए। इस नई नीति में टोल गेट खत्म करने की समयबद्ध योजना भी शामिल है। यानी, एक नई यात्रा संस्कृति की शुरुआत होने जा रही है – तेज़, सरल और सस्ती!
टोल प्लाजा की जगह प्रति किलोमीटर शुल्क का फार्मूला
प्रस्तावित नई टोल नीति अब टोल प्लाजा की व्यवस्था से हटकर सीधे प्रति किलोमीटर आधारित शुल्क प्रणाली पर आधारित होगी। नीति के तहत औसतन सौ किलोमीटर के लिए पचास रुपये टोल शुल्क तय किया गया है। सबसे अहम बदलाव यह है कि अब सिर्फ 3000 रुपये देकर वार्षिक पास लिया जा सकेगा, जिससे कार चालक साल भर देश के किसी भी हाईवे या एक्सप्रेस वे पर मुफ्त यात्रा कर सकेंगे।
पास नहीं, बस FASTag से होगा भुगतान
इस योजना के तहत यात्रियों को अलग से कोई पास लेने की ज़रूरत नहीं होगी। FASTag अकाउंट के ज़रिए ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे सिस्टम को डिजिटली ट्रैक करना आसान होगा और टोल प्लाजा पर रुकावटें भी कम होंगी।
सबसे बड़ी अड़चन थी कि मौजूदा कंसेसनरों और कांट्रैक्टरों के अनुबंध में ऐसी कोई सुविधा नहीं है। लेकिन अब सरकार ने डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर नुकसान की भरपाई करने का फार्मूला तय कर लिया है। जो भी अंतर होगा, उसे सरकार की ओर से भरा जाएगा, जिससे निजी कंपनियों की आपत्ति भी खत्म हो सके।

लाइफटाइम पास पर विचार लेकिन नहीं बनी सहमति
पहले तीस हजार रुपये में 15 साल का लाइफटाइम पास देने पर भी चर्चा हुई थी। लेकिन राज्यों के नियम, बैंकों की हिचक और उपयोगकर्ताओं की संभावित उदासीनता के चलते इसे फिलहाल टाल दिया गया है। अब केवल वार्षिक पास योजना पर ही काम हो रहा है।
नई टोल नीति का एक और बड़ा फोकस बैरियर-फ्री इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग है। इसके लिए तीन पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चलाए गए हैं जिनमें 98% तक सटीकता पाई गई है। इसमें ANPR (Automatic Number Plate Recognition) तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
बैंकों को मिलेंगे अधिक अधिकार
अगर कोई वाहन बिना टोल भुगतान किए निकल जाता है, तो इसकी वसूली के लिए बैंकों को अधिक अधिकार दिए जाएंगे। वे FASTag या अन्य पेमेंट मोड में न्यूनतम बैलेंस की शर्त लागू कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर पेनाल्टी भी वसूल सकते हैं।
नई नीति की शुरुआत दिल्ली-जयपुर हाईवे से होने की संभावना है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। मंत्रालय की योजना है कि साल के अंत तक ANPR सिस्टम पूरे देश में सक्रिय कर दिया जाए।
शुरुआत भारी वाहनों से, सेंसर और कैमरे तैयार
इस सिस्टम की शुरुआत सबसे पहले भारी वाहनों और खतरनाक सामग्री ले जाने वाले ट्रकों से की जाएगी। पूरे नेटवर्क की मैपिंग पूरी हो चुकी है और नए सेंसर और कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं जो फास्टैग और ANPR दोनों के साथ सिंक में काम करेंगे।
लोगों की सबसे आम शिकायत ….स्कैनर का ठीक से काम न करना और गाड़ी को आगे-पीछे करना – इस नई तकनीक के आने से दूर हो सकेगी। ANPR के ज़रिए गाड़ी की नंबर प्लेट अपने आप स्कैन होगी और टोल राशि कट जाएगी।
सरकार की “एक वाहन, एक फास्टैग” नीति के तहत पिछले साल 1 करोड़ फास्टैग रद्द किए गए थे। लेकिन अभी भी लाखों अवैध या अक्रिय फास्टैग उपयोग में हैं। इन्हें चिह्नित करने के लिए टोल ऑपरेटरों को निर्देश दिए गए हैं।
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