Kartik Purnima 2025: इस साल की देव दीपावली को बनाइए खास, जानिए शुभ तिथि, पूजा-विधि और दीपदान के नियम

आस्था का उत्थान और गंगा किनारे अर्थव्यवस्था

देव दीपावली के अवसर पर तटवर्ती इलाकों में तीर्थयात्रियों की आवक बढ़ती है — मेले, लंगर, स्थानीय व्यापार और होटलों को आर्थिक मौका मिलता है। इस बार पर्यटन व स्थानीय व्यापारों ने विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रकाशोत्सव की तैयारियाँ तेज कर दी हैं। वहीं प्रशासन संसाधन और भीड़ नियंत्रण की रणनीतियाँ लागू कर रहा है ताकि धार्मिक आयोजन सुव्यवस्थित व सुरक्षित बने रहे।

पर्यावरण और सुरक्षा का सवाल

दीपदान की परंपरा के चलते जल-स्तर व तटों पर प्लास्टिक व अवशेषों की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए प्रशासन व धर्मसंस्थाएँ इको-फ्रेंडली दीप, कागज़ के दीप, और स्वच्छता अभियानों पर जोर दे रही हैं। साथ ही, गंगा स्नान के लिए निर्धारित मुहूर्तों में लोगों को भीड़ नियंत्रण और सामाजिक दूरी का पालन करने हेतु निर्देश दिए जा रहे हैं।

देव दीपावली (कार्तिक पूर्णिमा) 2025 — मुहूर्त और प्रमुख जानकारी

  • तिथि आरंभ: 04 नवम्बर 2025, रात 10:36 बजे
  • तिथि समापन: 05 नवम्बर 2025, शाम 6:48 बजे
  • गंगा स्नान मुहूर्त: सुबह 04:52 से 05:44 बजे
  • पूजा मुहूर्त: सुबह 07:58 से 09:20 बजे

पूजा-विधि (सरल चरण)

  1. स्नान और शुद्धिकरण: प्रभात में गंगा या किसी पवित्र जलाशय में स्नान करें।
  2. पूजा सामग्री: फूल, दीपक (इको-फ्रेंडली), धूप, फल, तिल, चावल, घी और ब्राह्मण/पंडित को दान।
  3. सत्यनारायण कथा: सत्यनारायण वाचन करने से मनोकामना पूर्ण मानी जाती है।
  4. दीपदान: गंगा या तालाब में दीपक (सुरक्षित व पर्यावरण-अनुकूल) जलाना शुभ।
  5. व्रत पारण: संध्या के समय व्रत का पारण करें और परिवार सहित प्रसाद बांटें।

 पर्व को सुरक्षित और पर्यावरण-मैत्री बनाने के उपाय

  • प्लास्टिक मुक्त कार्यक्रम रखें — मोमबत्ती के बजाय कागज़/बायोडिग्रेडेबल दीप अपनाएँ।
  • दीपदान स्थल पर सफाई टीम और कचरा निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
  • भीड़-प्रबंधन के लिए निर्धारित समय का पालन करें और मास्क/सैनेटाइजर साथ रखें।
  • स्थानीय व्यापारों से स्थानीय उत्पाद खरीदकर समुदाय का समर्थन करें।
5 नवंबर 2025 की देव दीपावली आध्यात्मिक श्रद्धा का पर्व होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अवसर भी लाएगी। इस साल आयोजन का असली मापदंड यह होगा कि कैसे श्रद्धालु, धर्मसंस्थाएँ और प्रशासन मिलकर इसे सुरक्षित, सुव्यवस्थित और पर्यावरण-उत्तरदायी बनाते हैं।

 

Disclaimer: इस लेख में दी गई धार्मिक, ज्योतिषीय एवं पारंपरिक जानकारी सामान्य मान्यताओं और पुराणों पर आधारित है। बोध सौरभ या लेखक इन मान्यताओं की सत्यता का दावा नहीं करते। पाठक अपने विवेक और विश्वास के अनुसार पूजा-विधि एवं धार्मिक अनुष्ठान करें। तिथि और मुहूर्त संबंधी जानकारी पंचांग व ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार संकलित की गई है, जिनमें क्षेत्रीय भिन्नता संभव है।

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Bodh Saurabh Web Team

Bodh Saurabh is an experienced Indian journalist and digital media professional, with over 14 years in the news industry. He currently works as the Assistant News Editor at Bodh Saurabh Digital, a platform known for providing breaking news and videos across a range of topics, including national, regional, and sports coverage.

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