Israel Iran War: पश्चिम एशिया एक बार फिर परमाणु संकट के मुहाने पर खड़ा है। इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है कि कहीं यह टकराव परमाणु युद्ध में न बदल जाए। इजराइली मिसाइलें ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बना रही हैं, तो वहीं ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने का संकेत दिया है।(Israel Iran War) इन हालातों ने वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों को लेकर बनी संधियों और भारत की नीति को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला दिया है।
क्या है एनपीटी, सीटीबीटी और टीपीएनडब्ल्यू?
NPT (Nuclear Non-Proliferation Treaty) का उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और न्यूक्लियर एनर्जी के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है। 1970 में लागू हुई इस संधि पर अब तक 191 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं, लेकिन भारत इससे बाहर है।
CTBT (Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty) 1996 में प्रस्तावित हुई थी, जिसका मकसद सभी प्रकार के न्यूक्लियर परीक्षणों पर रोक लगाना था। हालांकि यह संधि आज तक लागू नहीं हो सकी है।
TPNW (Treaty on the Prohibition of Nuclear Weapons) को 2017 में UN महासभा ने अपनाया था और यह 2021 में लागू हुई। इसका लक्ष्य परमाणु हथियारों पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन भारत, अमेरिका, रूस जैसे सभी प्रमुख परमाणु संपन्न देशों ने इससे दूरी बनाए रखी है।
ईरान का रुख और वैश्विक चिंताएं
ईरान के विदेश मंत्रालय ने हाल में संकेत दिए हैं कि देश की संसद एनपीटी से बाहर निकलने पर विचार कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाघेई ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हालात के मुताबिक संसद कोई भी निर्णय ले सकती है। अगर ईरान वास्तव में एनपीटी छोड़ता है, तो यह वैश्विक परमाणु अप्रसार ढांचे के लिए बड़ा झटका होगा।
भारत का संतुलित लेकिन सख्त रुख
भारत ने अब तक किसी भी प्रमुख परमाणु संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। भारत का मानना है कि NPT और CTBT जैसी संधियाँ भेदभावपूर्ण हैं, जो कुछ देशों को विशेषाधिकार देती हैं और बाकी पर बंदिशें लगाती हैं। भारत ‘नो फर्स्ट यूज़’ (पहले उपयोग नहीं) नीति का पालन करता है और अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चाहता है।
जहाँ TPNW को लेकर भारत का रुख स्पष्ट है — “हम इस संधि का हिस्सा नहीं बनेंगे और इससे उत्पन्न किसी दायित्व के लिए बाध्य नहीं होंगे।” भारत इस मुद्दे पर एक स्वतंत्र और जिम्मेदार परमाणु राष्ट्र के रूप में खड़ा है, जो शांति और संतुलन के पक्ष में है।
दुनिया में परमाणु हथियारों का जखीरा
वर्तमान में दुनिया के पास 9 परमाणु संपन्न देश हैं, जिनके पास कुल 9614 से अधिक परमाणु हथियार हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार:
- रूस: 4309
- अमेरिका: 3700
- चीन: 600
- फ्रांस: 290
- ब्रिटेन: 225
- भारत: 180
- पाकिस्तान: 170
- इजराइल: 90
- उत्तर कोरिया: 50
क्या होगा अगर परमाणु युद्ध छिड़ गया?
एक छोटा परमाणु हथियार भी लाखों लोगों की जान ले सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि 10-20 किलोटन का एक छोटा विस्फोट एक लाख से अधिक लोगों को मार सकता है, जबकि 1-5 मेगाटन का बम 20 लाख और 10 मेगाटन से ज्यादा का बम 1 करोड़ लोगों को मौत के घाट उतार सकता है।
पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति न केवल उस क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा बनती जा रही है। ऐसे समय में भारत की परिपक्व, स्वतंत्र और शांति-आधारित न्यूक्लियर नीति एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में उभरती है। लेकिन दुनिया को अब निर्णायक कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य परमाणु राख से ना ढँक जाए।
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