Agni-V missile: भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं में एक और क्रांतिकारी कदम बढ़ाते हुए अग्नि-V मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो देश की रणनीतिक सुरक्षा में एक नया अध्याय लिख रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की इस अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) में ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों से लगभग 13 गुना ज्यादा रेंज और अचूकता है। (Agni-V missile)इस मिसाइल में नई पीढ़ी की MIRV तकनीक है, जिससे एक ही उड़ान में कई लक्ष्य भेदने की क्षमता मिलती है।
अग्नि-V: रणनीतिक ताकत का प्रतीक
अग्नि-V मिसाइल भारत की सबसे उन्नत सॉलिड फ्यूल-प्रोपेल्ड बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 5,000 से 7,000 किलोमीटर तक फैली हुई है। इसका मतलब है कि यह चीन, पाकिस्तान समेत पूरे एशिया के कई दूरस्थ इलाकों को निशाना बना सकती है। इसे सड़क और रेल आधारित मोबाइल प्लेटफॉर्म से भी लॉन्च किया जा सकता है, जिससे यह अचानक और तेजी से कार्रवाई कर सके।
भारत की मिसाइल बस की ताकत
मार्च 2024 में ‘मिशन दिव्यास्त्र’ के तहत अग्नि-V का सफल परीक्षण MIRV (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicle) तकनीक के साथ किया गया। इस तकनीक की मदद से अग्नि-V एक ही उड़ान में 3 से 10 तक अलग-अलग वारहेड को विभिन्न लक्ष्यों पर दाग सकती है। इसे ‘मिसाइल बस’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह एक ही समय में दुश्मन की कई ठिकानों को निशाना बना सकती है।

ब्रह्मोस और अग्नि-V: अलग उद्देश्य, अलग ताकत
जहां ब्रह्मोस मिसाइल क्रूज मिसाइल के क्षेत्र में अपनी उच्च गति और सटीकता के लिए जानी जाती है, वहीं अग्नि-V एक रणनीतिक हथियार है, जो व्यापक और निर्णायक जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार की गई है। ब्रह्मोस छोटे-छोटे टारगेट्स पर सर्जिकल स्ट्राइक करती है, जबकि अग्नि-V मिसाइल पूरे क्षेत्र को दहला देने वाली रणनीतिक प्रतिक्रिया का परिचायक है।
रणनीतिक संतुलन में भारत की मजबूती
अग्नि-V मिसाइल भारत की दूसरी स्ट्राइक क्षमता को और मजबूत बनाती है, जो न्यूनतम परमाणु निरोधक नीति के तहत देश की सुरक्षा का प्रमुख आधार है। यह मिसाइल न केवल भारत की संप्रभुता को मजबूत करती है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक संतुलन में भी भारत की स्थिति को सुदृढ़ करती है।
भविष्य की ताकत: 10,000 किलोमीटर तक पहुंच
भारत की रक्षा अनुसंधान एजेंसियां अब अगली पीढ़ी की मिसाइल पर काम कर रही हैं, जिसकी रेंज 10,000 से 12,000 किलोमीटर तक हो सकती है। इस प्रोजेक्ट की सफलता से भारत उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो जाएगा, जिनके पास पूरी दुनिया को कवर करने वाली ICBM क्षमताएं हैं।


















































