Rajnath Singh Speech: दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की बैठक का मंच था, लेकिन माहौल एक राष्ट्रभक्ति से लबरेज जनसभा का-सा बन गया, जब देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान, पीओके और आतंकवाद को लेकर अपने विचार साझा किए। उनके शब्दों में केवल राजनीतिक संदेश नहीं था, बल्कि इतिहास,(Rajnath Singh Speech) संस्कृति और भविष्य का गूंजता हुआ स्वर था।
पीओके हमारे लिए ‘शक्ति सिंह’ है
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर एक ऐसी ऐतिहासिक उपमा दी, जिसने पूरे श्रोतामंडल को भावुक कर दिया। उन्होंने महाराणा प्रताप और उनके भाई शक्ति सिंह का उदाहरण देते हुए कहा…”जैसे महाराणा प्रताप ने अपने भाई शक्ति सिंह के बारे में कहा था कि वो भले ही अलग हो गया हो, लेकिन है तो मेरा भाई ही — एक दिन वो लौटकर मेरे पास आएगा। ठीक वैसे ही, पीओके भी हमारे लिए शक्ति सिंह जैसा है।
वो आज भले ही अलग हो गया हो, पर वह हमारा है। वो हमारे पास लौटेगा, इसमें हमें रत्ती भर भी संदेह नहीं है।” रक्षा मंत्री का यह ऐतिहासिक संदर्भ लोगों के दिलों को छू गया। उनके शब्दों में एक आत्मीयता थी, एक भरोसा था — कि पीओके से बिछड़े हमारे भाई-बहन एक दिन फिर से हमारी गोद में लौटेंगे।
“मैं भारत हूं, मैं वापस आया हूं”
राजनाथ सिंह ने विश्वास के साथ कहा कि एक दिन पीओके के लोग खुद कहेंगे…“मैं भारत हूं… मैं वापस आया हूं।” यह कोई राजनीतिक दावा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आत्मविश्वास की घोषणा थी — एक ऐसी पुकार जो सीमाओं से नहीं, दिलों से जुड़ी है।
अब बात सिर्फ आतंक और पीओके पर होगी
राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि अब उसकी चालबाजियों का समय खत्म हो चुका है।“आतंकवाद को बढ़ावा देना अब पाकिस्तान के लिए ‘कॉस्ट इफेक्टिव’ नहीं रहा। अब जब भी उससे बातचीत होगी, वह केवल दो मुद्दों पर केंद्रित होगी — आतंकवाद और पीओके।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब न सिर्फ आतंकी हमलों का मुंहतोड़ जवाब देता है, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी पूरी मजबूती से खड़ा है।
“भटके हुए लोग, लेकिन हमारे अपने हैं”
राजनाथ सिंह ने इस बात को भी दोहराया कि पीओके में रहने वाले लोग हमारे अपने हैं — उन्हें बस भटका दिया गया है। “हमारा विश्वास है कि वे एक दिन सच्चाई को पहचानेंगे। वो समझेंगे कि उनका भविष्य, उनकी पहचान, और उनका सम्मान — सब कुछ भारत से ही जुड़ा है।”
#WATCH | Delhi: Defence Minister Rajnath Singh says, “Most of the people in PoK feel a deep connection with India, there are only a few who have been misled. The situation of our brothers living in PoK is similar to that of the brave warrior Maharana Pratap’s younger brother… pic.twitter.com/B8Pj13rtjT
— ANI (@ANI) May 29, 2025
अब न आतंक झेलेंगे, न अपनों को भूले रहेंगे
इस पूरे संबोधन से भारत का संदेश स्पष्ट हो गया है — कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी एक देश की नहीं, बल्कि मानवता की लड़ाई है। और पीओके केवल भूगोल का विषय नहीं, दिलों का हिस्सा है।
शब्द नहीं, संकल्प था ये भाषण
राजनाथ सिंह का ये भाषण केवल एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं था — यह एक संकल्प था। इतिहास, संस्कृति, भावना और सुरक्षा नीति — चारों का संगम एक ही मंच पर दिखाई दिया। अब समय की धारा बदल रही है। भारत जाग चुका है, और उसके अपने — चाहे वे कहीं भी हों — उस जागरण की आहट सुन रहे हैं।
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